कौन यहां अब न्याय करे, खुद मात पिता रहते डर में, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

पूत कपूत हुए कुछ हैं, सहयोग नहीं करते घर में।

पास पड़ोस करें झगड़ा, हथियार लिए फिरते कर में।।

लोग भली कुछ बात कहें, वह भूल रहे पल ही भर में।

कौन यहां अब न्याय करे, खुद मात पिता रहते डर में।।

 

वहीं रजनीकान्त लवानिया ने स्वरचित अनुषमाष्टक पढ़ा तो वातावरण आध्यात्मिक हो उठा अजय शर्मा पढ़ा जिस मनुष्य काल को हम बैठे हैं वे सपने तो टूट गये सतयुग त्रेता द्वापर मिलकर सब कलयुग में डूब गये ।श्रोताओं सहित शहर के प्रमुख कवियों ने भाग लिया प्रसिद्ध गीतकार डॉ राजकुमार रंजन ने इन पंक्तियों पर वाहवाही लूटी –

जिअ तन माटी को कन भैया फिर काहे इतरावै

पाच तत्व का बनै पींजरा जस कौ तस ह्वै जावै

धावै इत उत करत गुमान धन को

 

अरविंद समीर ने कहा –

मैं ज़मी पर हूँ मगर तुम तो फलक बनती हो , दोस्ती में भी अदावत की झलक बनती हो ।

हिन्दी भाषा की श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए मुन्ना लाल मिश्र धुंआधार ने काव्यपाठ करते हुए कहा- “हिन्दी भाषा सम्मान बढ़े गौरव बढ़ जाय हमारा हिन्द देश की हिन्दी भाषा है उद्घोष हमारा” हिन्दी सीखो हिंदी बोलो हो पावन कंठ हमारा हिन्दी भाषा सम्मान कराना है कर्तव्य हमारा” रजनी कान्त लवानिया यादराम कविकिंकर, शिवशंकर सहज शाहिद महक बाह आचार्य उमाशंकर अतुल दुबे राजेन्द्र दवे कवियों का शानदार काव्यपाठ रहा। मुख्य अतिथि- महेन्द्र कुमार गोयल वरिष्ठ अधिवक्ता समाजसेवी विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार ओम ठाकुर ,आदर्श नन्दन गुप्त, डॉ महेश धाकड़ भी मौजूद रहे।

साहित्य सभा के अध्यक्ष अरुण रावत, महासचिव डॉ राजकुमार रंजन ,उपाध्यक्ष राजेश दीक्षित, सचिव अरविंद समीर, मीडिया प्रभारी कृष्ण कुमार सिंह राहुल राज, ठाकुर बलवीर सिंह अमित दीक्षित , श्री रामदास सनातन गोमती ट्रस्ट के हर्ष मिश्रा ने सभी कवियों अतिथियों का स्वागत शॉल माला एवं अभिनंदन पत्र देकर किया कवि पत्रकार एवं श्रोता मौजूद रहे। कर्न�

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