देश में ‘चौथे मोर्चे’ का उदय: पत्रकार और समाजसेवियों के महासंगम से बदलेगी सत्ता की दिशा!

*देश में ‘चौथे मोर्चे’ का उदय: पत्रकार और समाजसेवियों के महासंगम से बदलेगी सत्ता की दिशा!*
*​युग परिवर्तन का शंखनाद: ‘चौथा मोर्चा’ और भारत के नव-निर्माण की संकल्प यात्रा!*


​भारतीय लोकतंत्र आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। आजादी के सात दशकों बाद भी, जहाँ एक ओर देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार, व्यवस्थागत खामियों और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—मीडिया—की गिरती साख व असुरक्षा जैसे मुद्दे एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। इन्हीं विषम परिस्थितियों के बीच, उत्तर प्रदेश की धरती से एक ऐसी गूँज सुनाई दे रही है जो देश की राजनीति और सामाजिक परिवेश की दिशा बदलने का सामर्थ्य रखती है।
​भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी, संस्थापक सदस्य एवं केंद्रीय पॉलिसी मेकिंग सुप्रीम कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष करन छौकर, केंद्रीय सलाहकार परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कृष्ण माधव मिश्रा एवं उनकी टीम ने संयुक्त रूप से ‘चौथे मोर्चे’ के गठन की घोषणा का संकेत देकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह मोर्चा कोई एक राजनीतिक गठबंधन नहीं है, बल्कि यह ‘दूसरी आजादी’ की प्रथम महाक्रांति का सूत्रपात है, जिसका ध्येय है—भ्रष्टाचार मुक्त भारत और सशक्त मीडिया।
​ ‘चौथा मोर्चा’—आवश्यकता और दर्शन-
​लोकतंत्र की परिभाषा में मीडिया को ‘चौथा स्तंभ’ माना जाता है, जो कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की निगरानी करता है। लेकिन वर्तमान समय में यह स्तंभ स्वयं कई प्रकार के दबावों, आर्थिक असुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों के अभाव से जूझ रहा है।
​एके बिंदुसार का यह ‘चौथा मोर्चा’ इसी रिक्तता को भरने के लिए तैयार किया गया है। इसका दर्शन स्पष्ट है: जब तक ‘चौथा स्तंभ’ स्वयं मजबूत, सुरक्षित और स्वतंत्र नहीं होगा, तब तक एक भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र की कल्पना करना बेमानी है। यह मोर्चा उन सभी लोगों का एक समावेशी मंच है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति जवाबदेह हैं और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) रखते हैं।
​ महासंगठन—एक मंच, एक लक्ष्य-
​इस मुहिम की सबसे बड़ी शक्ति इसकी समावेशिता है। कृष्ण माधव मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि यह मोर्चा किसी एक व्यक्ति या दल की जागीर नहीं, बल्कि एक ‘महासंगठन’ है। इसमें शामिल होने के लिए निम्न श्रेणियों को आमंत्रित किया गया है:
​पत्रकार बिरादरी: वे निडर कलमकार जो व्यवस्था की खामियों को उजागर करने में अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उन्हें अब सुरक्षा और सम्मान का संवैधानिक कवच मिलेगा।
​सामाजिक कार्यकर्ता: धरातल पर बदलाव की मशाल जलाने वाले सामाजिक योद्धाओं को एक व्यवस्थित मंच प्रदान किया जाएगा।
​मीडिया संगठन: विभिन्न पत्रकार यूनियनों और प्रेस क्लबों मीडिया संस्थान को एक साथ लाकर एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाया जा रहा है।
​समान विचारधारा वाले राजनीतिक दल: वे पार्टियाँ जो जाति-पाति और तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठकर ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ और ‘मीडिया की स्वतंत्रता’ को अपना मुख्य एजेंडा मानती हैं।
​क्या है ‘दूसरी आजादी की प्रथम महाक्रांति’?
​एके बिंदुसार एवं पंडित बालकृष्ण तिवारी का यह आह्वान कि यह ‘दूसरी आजादी’ की शुरुआत है, बहुत गहरे मायने रखता है। प्रथम आजादी हमें विदेशी शासन से मिली थी, लेकिन ‘दूसरी आजादी’ का अर्थ है—भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, मीडिया पर सेंसरशिप और तानाशाही से मुक्ति।
​इस क्रांति के मुख्य बिंदु –
​मीडिया को संवैधानिक सुरक्षा: पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा कानून और उनके कार्य की गरिमा को संवैधानिक मान्यता दिलाना।
​व्यवस्थागत पारदर्शिता: हर सरकारी कार्य और निर्णय में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे।
​समान नागरिक सम्मान: समाज के हर वर्ग को अपनी बात रखने का बिना किसी डर के अधिकार मिलना।
लोकतंत्र में भागीदारी: राज्यसभा एवं विधान परिषद में पत्रकारों के लिए कोटा फिक्स करना आवश्यक है।

राजनीतिक गलियारों में खलबली और जनता का विश्वास,
​जैसे ही ‘चौथे मोर्चे’ के गठन की खबर सामने आई हैं, राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। स्थापित दल, जो अब तक पत्रकारों की उपेक्षा करते आए हैं, अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता एक साथ आ गए, तो ‘वोट बैंक’ की राजनीति पूरी तरह से बदल जाएगी।
​यह मोर्चा उन आम लोगों की उम्मीद बनकर उभरेगा जो दशकों से बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। करन छौकर और उनकी टीम का व्यक्तित्व और उनका अब तक का संघर्षपूर्ण सफर इस बात का प्रमाण है कि यह मोर्चा केवल चुनाव जीतने किसी को जीतने या हारने के लिए नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टम’ तैयार करने के लिए है।
​स्वर्णिम भविष्य की ओर
​’सशक्त मीडिया, समृद्ध भारत’—यह नारा आने वाले दिनों में हर भारतीय की जुबान पर होगा। एके बिंदुसार ने जिस बीज को बोया है, वह अब वटवृक्ष बनने की ओर अग्रसर है। यह मोर्चा उन लोगों के लिए एक चुनौती है जो लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहे हैं, और उन लोगों के लिए एक वरदान है जो देश को प्रगति के पथ पर देखना चाहते हैं।
​आने वाला समय इस ‘चौथे मोर्चे’ के लिए अग्निपरीक्षा का होगा, लेकिन संगठन के संस्थापक एवं पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का दृढ़ संकल्प और समर्थकों का उत्साह स्पष्ट संकेत देता है कि अब भारत का लोकतंत्र एक नई इबारत लिखने के लिए तैयार है। यह क्रांति शुरू हो चुकी है, और अब रुकना असंभव है।
संगठन के संस्थापक सदस्य एवं केंद्रीय सलाहकार परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष पंडित कृष्ण माधव मिश्रा ने कहा कि अब तक आठ क्षेत्रीय राजनीतिक दल मोर्चे में शामिल होने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी हैं और कई मीडिया संगठन व पत्रकार संगठन एवं राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों से वार्ता जारी हैं।
उन्होंने कहा कि 23 अगस्त के बाद मोर्चा का नाम एवं शामिल घटक पत्रकार एवं सामाजिक संगठन एवं राजनीतिक दलों के नाम की घोषणा की जाएगी।

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