WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

सिर्फ एक तारीख पर गैर-हाजिर होने से सीधे NBW? BMFNEWS

सिर्फ एक तारीख पर गैर-हाजिर होने से सीधे NBW?

किसी व्यक्ति को जमानत मिलना केवल जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं है। जमानत का मतलब यह भी है कि जब अदालत बुलाएगी, अभियुक्त न्यायालय के सामने उपस्थित होगा।

लेकिन यदि किसी तारीख पर वह उपस्थित नहीं हो पाया, तो क्या अदालत बिना किसी कारण बताए सीधे Non-Bailable Warrant (NBW) जारी कर सकती है?

इसी सवाल पर उड़ीसा हाईकोर्ट ने 09 जून 2026 को Trinath Guru & Anr. v. State of Odisha, CRLMC No. 1806 of 2026 में महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

मामले में अभियुक्त पहले से जमानत पर था। एक तारीख पर वह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और ट्रायल कोर्ट ने सीधे उसके विरुद्ध NBW जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने इस तरीके को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने ध्यान दिलाया कि जब अभियुक्त पहले से bail पर है, तब उसकी अनुपस्थिति की स्थिति में अदालत के पास कम कठोर रास्ते भी उपलब्ध हैं जैसे surety/bailor को notice देना अथवा परिस्थितियों के अनुसार bailable warrant जारी करना।

महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने यह नहीं कहा कि NBW कभी सीधे जारी नहीं किया जा सकता। ऐसा कहना इस फैसले को जरूरत से ज्यादा व्यापक बना देगा।

असल सिद्धांत यह है कि NBW एक कठोर coercive measure है, इसलिए इसे यांत्रिक ढंग से नहीं बल्कि परिस्थितियों को देखते हुए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यदि अदालत सीधे NBW जारी करती है तो उसके पीछे उचित और compelling कारण होना चाहिए।

Bail अपने-आप खत्म नहीं होती इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी तारीख पर अभियुक्त की अनुपस्थिति मात्र से उसकी पहले से मिली bail अपने-आप समाप्त नहीं हो जाती।

Bail granted होने के बाद उसे केवल उचित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही समाप्त/cancel किया जा सकता है।

यानी एक तारीख पर गैर-हाजिरी ≠ Bail स्वतः समाप्त

और

गैर-हाजिरी ≠ हर परिस्थिति में सीधे NBW

अदालत को परिस्थितियों की गंभीरता, अनुपस्थिति का कारण, अभियुक्त का आचरण और न्यायालय की प्रक्रिया से बचने की कोई कोशिश है या नहीं—इन सब बातों को देखना होगा।

Personal Liberty का सवाल आखिरकार मामला केवल एक warrant का नहीं है।

NBW का सीधा परिणाम किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और custody से जुड़ सकता है। इसलिए न्यायालय को यह संतुलन बनाए रखना होता है कि एक ओर आरोपी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित हो और दूसरी ओर उसकी liberty पर आवश्यकता से अधिक कठोर हस्तक्षेप न हो।

यही कारण है कि कम कठोर उपाय उपलब्ध होने पर उनके बारे में विचार करना न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता.

 

इसलिए इस फैसले का सही सार यह नहीं है कि—

“पहले BW, फिर ही NBW—हर मामले में।”

बल्कि सही बात यह है—

“पहले से bail पर मौजूद अभियुक्त के विरुद्ध केवल सामान्य गैर-हाजिरी के आधार पर, बिना परिस्थितियों और कम कठोर विकल्पों पर विचार किए तथा बिना पर्याप्त कारण दर्ज किए सीधे NBW जारी करना उचित नहीं है।”

यही Trinath Guru & Anr. v. State of Odisha का वास्तविक महत्व है—कानून की प्रक्रिया कठोर हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामले में वह बिना कारण कठोर नहीं हो सकती।

 

 

हृदयेश उपाध्याय एडवोकेट कलेक्ट्रेट परिसर एटा। मो0 नं0-9634323108,9368120650

Leave a Comment