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सम्पादकीय या त्वरित टिप्पणी  अर्जुन पुरस्कार की सच्ची हकदार: मैदान पर ढाल बनने वाली ताजनगरी की दीप्ति, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

सम्पादकीय या त्वरित टिप्पणी

 

अर्जुन पुरस्कार की सच्ची हकदार: मैदान पर ढाल बनने वाली ताजनगरी की दीप्ति

हरारे के मैदान पर जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई ऐतिहासिक शतकीय पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आगरा की बेटी दीप्ति शर्मा भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे मजबूत रीढ़ हैं। पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ मिलकर खड़ा किया गया विशाल स्कोर और दीप्ति का हरफनमौला खेल महज एक मैच की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस निरंतरता का प्रमाण है जो एक खिलाड़ी को महान बनाती है। यही कारण है कि खेल जगत और प्रशंसकों के बीच अब दीप्ति शर्मा को देश के प्रतिष्ठित ‘अर्जुन अवार्ड’ से सम्मानित किए जाने की मांग ने बेहद जोर पकड़ लिया है। क्रिकेट के मैदान पर देश की ढाल बनने वाली इस खिलाड़ी के लिए यह सम्मान न सिर्फ उनकी प्रतिभा का आदर होगा, बल्कि उन जैसी करोड़ों बेटियों के सपनों को भी नई उड़ान देगा।

दीप्ति के आज के इस स्वर्णिम सफर को देखने के बाद उनके खिलाड़ी बनने की वह ऐतिहासिक घटना याद आती है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। महज साढ़े नौ साल की उम्र में, वह आगरा के एकलव्य स्टेडियम में अपने बड़े भाई सुमित को अभ्यास करते देखने गई थीं। खेल के दौरान अचानक एक गेंद बाउंड्री के बाहर आई, तो नन्ही दीप्ति ने उसे उठाकर सीधे स्टंप्स पर दे मारा। वह थ्रो इतना सटीक और सीधा था कि वहां मौजूद महिला टीम की पूर्व चयनकर्ता हेमलता काला की नजरें उस पर टिक गईं। हेमलता जी ने उसी पल भांप लिया था कि इस छोटी सी बच्ची में एक असाधारण क्रिकेटर छुपा है। बस, वहीं से आगरा की इस मिट्टी ने भारतीय क्रिकेट को उसकी भावी स्टार सौंप दी। स्टेडियम की उस एक घटना ने दीप्ति के जीवन का रुख हमेशा के लिए बदल दिया।

एक दर्शक दीर्घा से निकलकर मैदान के बीचोबीच देश की ‘संकटमोचक’ बनने का यह सफर कड़े संघर्षों, आंसुओं और अटूट मेहनत से सींचा गया है। आज जब हरारे में उनके बल्ले और गेंद की गूंज सुनाई देती है, तो आगरा समेत पूरा देश जश्न में डूब जाता है। छोटे शहर की एक लड़की का दुनिया के कोने-कोने में तिरंगा लहराना यह संदेश देता है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर की मोहताज नहीं होती।

दीप्ति शर्मा का ऑलराउंडर प्रदर्शन और टीम इंडिया के प्रति उनका समर्पण आज हर कसौटी पर खरा उतरा है। खेल के प्रति उनके इसी बेमिसाल जज्बे को देखते हुए उन्हें अर्जुन अवार्ड दिए जाने की बात अब पूरी तरह तर्कसंगत और न्यायसंगत लगती है। उम्मीद है कि खेल मंत्रालय इस असाधारण खिलाड़ी की उपलब्धियों को सर्वोच्च सम्मान देकर ताजनगरी के साथ-साथ पूरे देश के खेल प्रेमियों को गौरवान्वित होने का एक और बड़ा अवसर प्रदान करेगा। हरारे की इस ऐतिहासिक सफलता पर दीप्ति और पूरी टीम को ढेरों शुभकामनाएं।

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