एटा *थाने से नहीं मिला इंसाफ तो… ड्रिप चढ़ती पत्नी को गोद में लेकर तहसील दिवस पहुंचा पति!*
*छेनी-हथौड़े के वार से सिर फटा, दांत टूटे; बच्ची पर भी हमले का आरोप— पुलिस थाने के चक्कर काटने के बाद, सुनवाई ना होने पर पत्नी को गोद में लेकर अधिकारियों के सामने लाना पड़ा*
*ड्रिप लगी थी, पेशाब की थैली लगी थी… शरीर जवाब दे चुका था, लेकिन न्याय की उम्मीद बाकी थी; एसडीएम-तहसीलदार कुर्सी छोड़कर पहुंचे*
एटा। तहसील दिवस में शनिवार को उस समय पूरे प्रशासनिक परिसर में सन्नाटा छा गया, जब एक पति अपनी गंभीर रूप से घायल पत्नी को गोद में उठाकर अधिकारियों के सामने पहुंचा। महिला के हाथ में ड्रिप लगी थी और पेशाब की थैली लगी हुई थी। वह खुद चलने की स्थिति में नहीं थी।
यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं था, बल्कि थाना कोतवाली देहात पुलिस की कार्रवाई पर बड़ा सवाल भी छोड़ गया।
*छेनी-हथौड़े से हमला, सिर फाड़ने और दांत तोड़ने का आरोप*
पीड़िता किरण देवी के पति संजीव कुमार के अनुसार, 31 अगस्त को राजवीर और उसके पुत्र रोहित व लालू छेनी-हथौड़े से मकान तोड़ रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर किरण देवी पर हमला कर दिया।
आरोप है कि हथौड़े के वार से महिला के सिर में गंभीर चोट आई और छेनी से उसके दांत तोड़ दिए गए।
बच्ची पर भी हथौड़े से हमला करने का आरोप है, जिससे उसके मुंह से खून आने की बात कही गई है।
महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगरा हायर सेंटर रेफर किया गया।
*कुर्सी छोड़कर महिला के पास पहुंचे अफसर*
तहसील दिवस में महिला की हालत देखकर एसडीएम श्वेता सिंह और तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय तत्काल अपनी कुर्सियों से उठे और उसके पास पहुंचे। अधिकारियों ने महिला को सांत्वना दी तथा कोतवाली देहात पुलिस को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
यानी जिस महिला को अस्पताल में इलाज की जरूरत थी, उसे प्रशासन के सामने अपना दर्द दिखाने के लिए तहसील दिवस आना पड़ा।
यहीं से कोतवाली देहात पुलिस की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है
*“कानून का डर” आखिर कहां है?*
एक महिला पर कथित रूप से छेनी-हथौड़े से हमला होता है। महिला गंभीर रूप से घायल होकर हायर सेंटर पहुंचती है। परिवार पुलिस से शिकायत करता है। उधर बच्चों को धमकाए जाने की बात सामने आती है।
थाना कोतवाली देहात प्रभारी कृष्णकांत लोधी का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन अब सिर्फ मुकदमा दर्ज होने और कार्रवाई के आश्वासन से बात नहीं बनेगी।
क्योंकि पीड़िता की हालत खुद बता रही है कि मामला कितना गंभीर है।
अगर आरोप सही हैं तो पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले, आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई हो।
*तहसील दिवस से उठा सबसे बड़ा सवाल*
“जिस महिला को अस्पताल में होना चाहिए था, वह ड्रिप चढ़ी हालत में न्याय के लिए तहसील दिवस क्यों पहुंची?”
अब कोतवाली देहात पुलिस को बताना होगा कि कार्रवाई कागज पर हुई है या जमीन पर भी दिखेगी।
तहसील दिवस में महिला की हालत ने सिर्फ अधिकारियों का ध्यान नहीं खींचा—इसने पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
*सबसे बड़ा सवाल*
“उत्तर प्रदेश पुलिस सदैव आपकी सेवा में तत्पर” है… तो फिर न्याय के लिए ड्रिप चढ़ी महिला को तहसील दिवस की चौखट तक क्यों आना पड़ा?
यह सवाल सिर्फ बार्थर गांव की किरण देवी का नहीं, बल्कि हर उस महिला का है जो पुलिस से सुरक्षा और न्याय की उम्मीद करती है।













