WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

कहानी ‘हवाई हमला’ के जरिए दलित चेतना पर हुई गंभीर चर्चा, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

कहानी ‘हवाई हमला’ के जरिए दलित चेतना पर हुई गंभीर चर्चा

 

आगरा। हिंदी के युवा कथाकार अर्जुन सावेदिया की कहानी ‘हवाई हमला’ के पाठ के साथ रविवार को आगरा में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ‘क़िस्सा कहानी-6’ में दलित चेतना, समकालीन हिंदी कथा साहित्य और सामाजिक विमर्श पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन रंगलीला, कथादेश और एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के संगठन शीरोज़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जबकि आतिथ्य नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा दिया गया। कार्यक्रम सभा के लाइब्रेरी हॉल में आयोजित हुआ।

 

कार्यक्रम में अर्जुन सावेदिया ने अपनी कहानी ‘हवाई हमला’ का पाठ किया। कहानी के एक मार्मिक अंश — “कोई मिलने नहीं आयेगा…” — ने श्रोताओं को गहरे भावनात्मक स्तर पर प्रभावित किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ आलोचक प्रियम अंकित ने ‘अर्जुन की कहानी की रोशनी में हिंदी कहानियों में दलित चेतना के स्वर’ विषय पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि दलित राजनीति के उत्थान के साथ दलित शोषण के खिलाफ मुखर आवाजें उठीं, जिनसे समाज में परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि हिंदी दलित कथा-साहित्य की यात्रा तीन दशक पूरे कर चौथे दशक में प्रवेश कर चुकी है और अब इसकी वैचारिक दिशा तथा विकास पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

 

कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश ने कहा कि कहानी वर्तमान दौर के दलित विमर्श को नए तरीके से प्रस्तुत करती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कहानी में कई विमर्शों को साथ जोड़ने से कुछ स्थानों पर वैचारिक मिश्रण की स्थिति भी बनी है।

 

मुख्य वक्ता लेखक एवं समीक्षक प्रो. रामवीर सिंह ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में दलित प्रश्न लंबे समय से मौजूद रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी कहानी में दलित चेतना की शुरुआत सबसे पहले मशहूर कथाकार मुंशी प्रेमचंद ने की थी।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं मीडियाकर्मी नीरज जैन ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रस्तुत कहानी दलित चेतना पर केंद्रित एक सशक्त तानाबाना बुनती है और दलित विमर्श कोई नया विषय नहीं बल्कि लंबे समय से समाज और साहित्य में मौजूद रहा है।

 

वरिष्ठ कवयित्री डॉ. शशि तिवारी ने कहानी को अत्यंत रुचिकर बताया। वहीं भरत सिंह ने कहा कि कहानी प्रभावशाली होने के बावजूद समस्या का ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं करती। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की मानसिकता कुंद होती जा रही है और हम आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौटते दिखाई दे रहे हैं। जाकिर सरदार ने भी कहानी पर अपने विचार रखे।

 

आर.जे. अखलाक हुसैन ने एक शेर के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द और मानवता का संदेश दिया।

 

वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अनिल शुक्ल ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘क़िस्सा कहानी’ हिंदी, उर्दू और अन्य भारतीय भाषाओं की समकालीन कहानियों के प्रचार-प्रसार के लिए तैयार किया गया महत्वपूर्ण मंच है, जहां नामचीन कहानीकार अपनी श्रेष्ठ कहानियों का पाठ करते हैं और श्रोता उनसे सीधे संवाद करते हैं।

 

कार्यक्रम का संचालन प्रो. नसरीन बेगम ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मनमोहन भारद्वाज ने दिया। इस अवसर पर डॉ. गिरजा शंकर शर्मा, डॉ. महेश धाकड़, अर्निका माहेश्वरी, शलभ भारती, डॉ. कृष्ण के सिंह, अजय दुबे, प्रमोद सारस्वत, नरेश पारस, लईक खान, पूनम जाकिर, अमरदीप सिंह, नरेश तन्हा, अवधेश उपाध्याय, टोनी फास्टर, शरद सक्सेना, सुनील साकेत, वीरेंद्र ईमल और अरविंद समीर सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

Leave a Comment