औऱ जापान को भी हराने को लाले पड़ गए

आलोचक हर आईसीसी (ICC) टूर्नामेंट के बाद भारत की चयन नीति, टीम संयोजन और ‘रोटेशन पॉलिसी’ पर सवाल उठाते हैं, उनके मुंह पर यह मैच एक तमाचा है। हमने दुनिया को दिखा दिया है कि भले ही हम नॉकआउट मैचों में दबाव न झेल पाएं, लेकिन जब बात 5 ओवर के मैच में जापान को 2 रन से हराने की हो, तो भारत से बेहतर कोई नहीं!
चयनकर्ताओं को 21 तोपों की सलामी, जिन्होंने हमें यह दिन दिखाया!
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के दूरदर्शी चयनकर्ताओं को आज रात चैन की नींद आएगी। सालों की तपस्या, करोड़ों का आईपीएल बजट और भारत की तथाकथित “5 अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय टीमें बनाने की क्षमता” आखिरकार सानो क्रिकेट ग्राउंड पर रंग लाई। क्रिकेट इतिहास के इस सबसे बड़े महामुकाबले में, हमारे धुरंधरों ने जापान जैसी ‘क्रिकेट महाशक्ति’ को महज़ 2 रनों से हराकर देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है!
चयन प्रक्रिया की एक और ‘मास्टरस्ट्रोक’ जीत
चयनकर्ताओं की दूरदर्शिता की जितनी तारीफ की जाए कम है। जब दुनिया सोच रही थी कि शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल या ऋतुराज गायकवाड़ जैसे युवाओं को आज़माया जाएगा, हमारे चयनकर्ताओं ने अनुभव और युवा जोश का ऐसा अदभुत कॉकटेल (मिश्रण) मैदान पर उतारा कि जापानी कप्तान भी हैरान रह गए।
यह हमारी चयन प्रक्रिया की ही खूबसूरती है कि हम किसी भी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने या बाहर करने के लिए ‘क्वांटम फिजिक्स’ से भी जटिल थ्योरी का इस्तेमाल करते हैं। आज की इस 2 रन की ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि फॉर्म, फिटनेस और निरंतरता तो केवल मोह-माया हैं; असली जादू तो चयनकर्ताओं की पर्ची में होता है!
5 ओवरों का महासंग्राम: जब भारत के ‘सितारे’ हुए पस्त
भारी बारिश ने मैच को 5-5 ओवर का क्या किया, भारतीय बल्लेबाजों ने इसे सीधे ‘करो या मरो’ का फाइनल ही मान लिया।
अभिषेक शर्मा का ‘गोल्डन’ इम्पैक्ट: टी20 के नए सनसनी अभिषेक शर्मा ने क्रीज पर आते ही चयनकर्ताओं के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने पहली ही गेंद पर आउट होकर यह सुनिश्चित किया कि बाकी बल्लेबाजों को बल्लेबाजी का पूरा मौका मिले। निस्वार्थ भावना का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा!
कप्तान अय्यर की ‘धीमी और स्थिर’ कप्तानी: कप्तान श्रेयस अय्यर ने जापानी तेज गेंदबाजों की 120 किमी/घंटा की तूफानी गेंदों का डटकर सामना किया। उन्होंने 16 रनों की ऐसी ‘मैराथन’ पारी खेली, जिसे देखकर लगा कि वह एशियन गेम्स नहीं, बल्कि गाबा में टेस्ट मैच बचा रहे हैं।
कुल स्कोर – 32 रन: 5 ओवरों में 4 विकेट खोकर 32 रन! आईपीएल में 250 रन बनाने वाली टीम के स्टार्स ने जापान के उन गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए, जो शायद हफ्ते में सिर्फ दो दिन क्रिकेट की प्रैक्टिस करते हैं और बाकी दिन सुशी बनाते हैं।
गेंदबाजी का रोमांच: सांसे रोक देने वाला डिफेंस
33 रनों के इस ‘विशाल पहाड़’ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापानी टीम को रोकने के लिए भारत ने अपनी पूरी जान झोंक दी।
जापानी बल्लेबाजों का खौफ: जापान के कप्तान केंडेल कडोवाकी-फ्लेमिंग ने जब भारतीय गेंदबाजों को चौके लगाए, तो एक पल के लिए लगा कि चयनकर्ताओं को तुरंत मुख्य टीम से जसप्रीत बुमराह को चार्टर्ड प्लेन से जापान बुलाना पड़ेगा।
आखिरी गेंद का ड्रामा: वाशिंगटन सुंदर की फिरकी और किस्मत के सहारे भारत किसी तरह जापान को 30 रनों पर रोकने में कामयाब रहा। 2 रनों की यह ऐतिहासिक जीत यह बताने के लिए काफी है कि हमारी चयन प्रक्रिया कितनी सटीक है—हम किसी भी मैच को एकतरफा बोरिंग नहीं होने देते, चाहे सामने जापान ही क्यों न हो!
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आलोचक हर आईसीसी (ICC) टूर्नामेंट के बाद भारत की चयन नीति, टीम संयोजन और ‘रोटेशन पॉलिसी’ पर सवाल उठाते हैं, उनके मुंह पर यह मैच एक तमाचा है। हमने दुनिया को दिखा दिया है कि भले ही हम नॉकआउट मैचों में दबाव न झेल पाएं, लेकिन जब बात 5 ओवर के मैच में जापान को 2 रन से हराने की हो, तो भारत से बेहतर कोई नहीं!
चयनकर्ताओं को 21 तोपों की सलामी, जिन्होंने हमें यह दिन दिखाया!
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के दूरदर्शी चयनकर्ताओं को आज रात चैन की नींद आएगी। सालों की तपस्या, करोड़ों का आईपीएल बजट और भारत की तथाकथित “5 अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय टीमें बनाने की क्षमता” आखिरकार सानो क्रिकेट ग्राउंड पर रंग लाई। क्रिकेट इतिहास के इस सबसे बड़े महामुकाबले में, हमारे धुरंधरों ने जापान जैसी ‘क्रिकेट महाशक्ति’ को महज़ 2 रनों से हराकर देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है!
चयन प्रक्रिया की एक और ‘मास्टरस्ट्रोक’ जीत
चयनकर्ताओं की दूरदर्शिता की जितनी तारीफ की जाए कम है। जब दुनिया सोच रही थी कि शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल या ऋतुराज गायकवाड़ जैसे युवाओं को आज़माया जाएगा, हमारे चयनकर्ताओं ने अनुभव और युवा जोश का ऐसा अदभुत कॉकटेल (मिश्रण) मैदान पर उतारा कि जापानी कप्तान भी हैरान रह गए।
यह हमारी चयन प्रक्रिया की ही खूबसूरती है कि हम किसी भी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने या बाहर करने के लिए ‘क्वांटम फिजिक्स’ से भी जटिल थ्योरी का इस्तेमाल करते हैं। आज की इस 2 रन की ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि फॉर्म, फिटनेस और निरंतरता तो केवल मोह-माया हैं; असली जादू तो चयनकर्ताओं की पर्ची में होता है!
5 ओवरों का महासंग्राम: जब भारत के ‘सितारे’ हुए पस्त
भारी बारिश ने मैच को 5-5 ओवर का क्या किया, भारतीय बल्लेबाजों ने इसे सीधे ‘करो या मरो’ का फाइनल ही मान लिया।
अभिषेक शर्मा का ‘गोल्डन’ इम्पैक्ट: टी20 के नए सनसनी अभिषेक शर्मा ने क्रीज पर आते ही चयनकर्ताओं के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने पहली ही गेंद पर आउट होकर यह सुनिश्चित किया कि बाकी बल्लेबाजों को बल्लेबाजी का पूरा मौका मिले। निस्वार्थ भावना का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा!
कप्तान अय्यर की ‘धीमी और स्थिर’ कप्तानी: कप्तान श्रेयस अय्यर ने जापानी तेज गेंदबाजों की 120 किमी/घंटा की तूफानी गेंदों का डटकर सामना किया। उन्होंने 16 रनों की ऐसी ‘मैराथन’ पारी खेली, जिसे देखकर लगा कि वह एशियन गेम्स नहीं, बल्कि गाबा में टेस्ट मैच बचा रहे हैं।
कुल स्कोर – 32 रन: 5 ओवरों में 4 विकेट खोकर 32 रन! आईपीएल में 250 रन बनाने वाली टीम के स्टार्स ने जापान के उन गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए, जो शायद हफ्ते में सिर्फ दो दिन क्रिकेट की प्रैक्टिस करते हैं और बाकी दिन सुशी बनाते हैं।
गेंदबाजी का रोमांच: सांसे रोक देने वाला डिफेंस
33 रनों के इस ‘विशाल पहाड़’ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापानी टीम को रोकने के लिए भारत ने अपनी पूरी जान झोंक दी।
जापानी बल्लेबाजों का खौफ: जापान के कप्तान केंडेल कडोवाकी-फ्लेमिंग ने जब भारतीय गेंदबाजों को चौके लगाए, तो एक पल के लिए लगा कि चयनकर्ताओं को तुरंत मुख्य टीम से जसप्रीत बुमराह को चार्टर्ड प्लेन से जापान बुलाना पड़ेगा।
आखिरी गेंद का ड्रामा: वाशिंगटन सुंदर की फिरकी और किस्मत के सहारे भारत किसी तरह जापान को 30 रनों पर रोकने में कामयाब रहा। 2 रनों की यह ऐतिहासिक जीत यह बताने के लिए काफी है कि हमारी चयन प्रक्रिया कितनी सटीक है—हम किसी भी मैच को एकतरफा बोरिंग नहीं होने देते, चाहे सामने जापान ही क्यों न हो!
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