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उसेट घाट का पुल मामला पुल तो बन रहा है अभी मगर अफबाएं उसको शुरू कर देने की तेर व्रहिं हैं  जिलाधिकारी सुप्रीम कोर्ट के वकील से कहा न आदेश न कोई योजना, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

उसेट घाट का पुल मामला

पुल तो बन रहा है अभी मगर अफबाएं उसको शुरू कर देने की तेर व्रहिं हैं

जिलाधिकारी सुप्रीम कोर्ट के वकील से कहा न आदेश न कोई योजना

 

आगरा। मुरेना। सोशल मीडिया पर भ्रामक और आधी-अधूरी खबरों का फैलना आज के समय में एक बड़ी समस्या बन चुका है। चंबल नदी के उसैद घाट (पिनाहट) पर निर्माणाधीन पक्के पुल और वर्षाकाल में पांटून (पीपा) पुल हटाए जाने के बाद सीढ़ी लगाने की जो चर्चा है, वह पूरी तरह प्रशासनिक सुरक्षा मानकों और जमीनी हकीकत के विपरीत है।

जिलाधिकारी मुरैना या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निर्माणाधीन ऊंचे पिलरों या खतरनाक ढांचों पर आम जनता के लिए ‘सीढ़ी लगाकर’ पैदल चलने की बात कहना व्यावहारिक रूप से असंभव है, क्योंकि इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

 

सोशल मीडिया पर भ्रम बने रहने के मुख्य कारण:

आधिकारिक खंडन की कमी: अक्सर जिला प्रशासन (जैसे मुरैना कलेक्टर कार्यालय) सोशल मीडिया पर चलने वाली हर छोटी-बड़ी अफवाह या भ्रामक पोस्ट पर आधिकारिक प्रेस नोट या पक्ष जारी नहीं करता है। प्रशासन का मानना होता है कि केवल जमीन पर नियमों को लागू करना ही काफी है, जिससे यह भ्रम इंटरनेट पर जिंदा रह जाता है।

सनसनीखेज कंटेंट: कुछ स्थानीय सोशल मीडिया पेजों या ग्रुप्स द्वारा रीच (व्यूज) बढ़ाने के लिए जनता की अधूरी मांग या किसी व्यक्ति के निजी बयान को सीधे जिलाधिकारी का आदेश बताकर पेश कर दिया जाता है।

सुरक्षा के वास्तविक नियम: जब भी वर्षाकाल में पांटून पुल को हटाया जाता है, तब प्रशासन का स्पष्ट नियम होता है कि लोग अपनी जान जोखिम में न डालें। इसके विकल्प के रूप में स्टीमर या नाव का संचालन किया जाता है, न कि किसी निर्माणाधीन ऊंचे और खतरनाक पुल पर सीढ़ी लगाने की अनुमति दी जाती है।

आधिकारिक वेबसाइट देखें: किसी भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय की सत्यता जांचने के लिए मुरैना जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध ‘प्रेस विज्ञप्ति’ या ‘आदेश’ सेक्शन को देखें।अफवाहों को फॉरवर्ड न करें: जब तक किसी प्रतिष्ठित और स्थापित समाचार पत्र में इसकी पुष्टि न हो, तब तक ऐसी किसी भी पोस्ट को सच न मानें और न ही आगे शेयर करें।निर्माणाधीन पुलों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल बहुत कड़े होते हैं, इसलिए प्रशासन कभी भी ऐसी किसी असुरक्षित व्यवस्था की बात नहीं कहेगा।

 

इंसेट बॉक्स

सीढ़ी बनाने की ना कोई योजना, ना कोई आदेश

-ये बात कलेक्टर मुरैना ने सुप्रीम कोर्ट के वकील से फोन पर कही

-चंबल के उसैत घाट पर निर्माणाधीन पुल को लेकर बना असमंजस

चम्बल। उसैट घाट पर निर्माणाधीन पुल पर सीढ़ी बनाने का आदेश नहीं दिया गया है और नहीं कोई विभाग सीढ़ी बना रहा है। जो खबरें हैं वे सब हवा में हैं, सब गलत हैं, अफवाह हैं। ये बात मुरैना के कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल गुप्ता से दूरभाष पर कही।

करीब दस दिन से ये खबरें बढ़ा चढ़ाकर प्रसारित हो रहीं कि मुरैना के कलेक्टर ने पिनाहट की ओर से खड़े पोल पर सीढ़ी लगाकर यात्रियों को पैदल निकलने दिया जायेगा। ये बात पत्रकार शंकर देव तिवारी और सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल गुप्ता के गले नहीं उतरी तो पहले सेतु निगम से मुरैना भोपाल बात की। तो ऐसी बात की ताहिद नहीं हुई। गुरुवार को जब चीफ से बात हुई तो उसने साफ इंकार कर दिया। साथ ही उनका कहना यह भी था कि खबरों में जब डीएम का नाम है तो उनसे बात कीजिए। फिर नम्बर लेने का अभियान चला और शाम को वकील साहब को सफलता मिली। जब डीएम ने इन बातों को एक सिरे से खारिज कर दिया। आप को बता दें कि वकील गुप्ता और पत्रकार तिवारी जन हित में आए दिन ऐसी ही बातों को लेकर जोखिम उठाते रहते हैं।

 

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