आपकी बात आज की बात  अंत नहीं शुरुआत है … परभाव नहीं अभी , आलेख शंकर देव तिवारी

आपकी बात आज की बात

 

अंत नहीं शुरुआत है …

परभाव नहीं अभी

यदि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) वैभव सूर्यवंशी को अगले 15 वर्षों तक टीम इंडिया का मजबूत स्तंभ बनते देखना चाहता है, तो उन्हें तुरंत दोबारा अंतरराष्ट्रीय टीम में लाने की जल्दबाजी से बचना होगा। उन्हें वापस घरेलू क्रिकेट और ‘इंडिया ए’ के दौरों पर भेजना चाहिए ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बल्लेबाजी की कमियों को सुधार सकें। वैभव को किसी भी गुटबाजी या क्षेत्रीय राजनीति (मुंबई-दिल्ली) की बलि चढ़ने से बचाना खुद बीसीसीआई की नैतिक जिम्मेदारी है।

 

भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं को बहुत जल्दी सिर-आंखों पर बिठाने की परंपरा नई नहीं है, लेकिन 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का मामला वर्तमान में सबसे गंभीर बहस का विषय बन चुका है। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए विस्फोटक पारियां खेलकर सनसनी मचाने वाले इस किशोर को जब इंग्लैंड दौरे पर भारत की टी20 जर्सी सौंपी गई, तो इसे भारतीय क्रिकेट के नए युग की शुरुआत माना गया। लेकिन महज तीन मैचों (14, 13 और 15 रन) की असफलताओं के बाद उन्हें टीम से ड्रॉप किए जाने ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और बीसीसीआई की चयन नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खेल जगत अब यह पूछ रहा है: क्या वैभव को दिल्ली-मुंबई की राजनीति या किसी ‘स्टार कल्चर’ का शिकार बनाया गया, या फिर उन्हें जरूरत से पहले अंतरराष्ट्रीय आग में झोंक दें।

पूर्व भारतीय विकेटकीपर पार्थिव पटेल सहित कई विश्लेषकों ने अखबारों और बयानों के माध्यम से स्पष्ट कहा है कि वैभव को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना एक “भावनात्मक निर्णय” था। टीम मैनेजमेंट पर यह गंभीर आरोप लग रहा है कि उन्होंने टी20 विश्व कप विजेता और इन-फॉर्म बल्लेबाज संजू सैमसन को बाहर बैठाकर वैभव को मौका दिया।

आलोचकों का मानना है कि यदि वैभव को खिलाना ही था, तो उन्हें खुलकर खेलने की आजादी मिलनी चाहिए थी। उन्हें दबाव में यह कहकर खिलाया गया कि उन्हें राय और परिस्थितियों के मुताबिक ढलना होगा। इसके बाद केवल तीन पारियों के आधार पर उन्हें बाहर कर देना एक 15 साल के बच्चे के मानसिक आत्मविश्वास को ‘ध्वस्त’ करने जैसा है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, आईपीएल के सपाट मैदानों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जमीन-आसमान का अंतर होता है। इंग्लैंड दौरे पर मेजबान टीम के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर और अन्य गेंदबाजों ने वैभव की सबसे बड़ी कमजोरी—शॉर्ट-पिच (बाउंसर) गेंदें—को पूरी तरह उजागर कर दिया। 15 साल की उम्र में शरीर अभी पूरी तरह विकसित हो रहा होता है, और 145+ किमी/घंटे की रफ्तार से आती गेंदों के खिलाफ उनकी तकनीक में स्पष्ट कमियां दिखीं। यह इस बात का प्रमाण है कि वैभव को अभी घरेलू क्रिकेट (First Class/List A) में अपनी तकनीक को और मांजने की जरूरत थी।

अंत नहीं, यह शुरुआत है

वैभव के भविष्य को लेकर जो सबसे गंभीर बात कही जानी चाहिए, वह यह है कि उनका करियर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह एक मूल्यवान सबक है। महान खिलाड़ी तीन पारियों में नहीं बनते। इंग्लैंड की असफलताओं ने उन्हें वह सिखाया है जो आईपीएल का स्टारडम कभी नहीं सिखा सकता था।

गौतम गंभीर को भी एक कोच के रूप में सोशल मीडिया की हाइप और प्रशंसकों के दबाव से बचकर वैभव के कार्यभार (Workload) को संभालना होगा। खुद गंभीर ने भी माना है कि वैभव एक “गॉड गिफ्टेड टैलेंट” हैं, लेकिन उनके साथ अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

शंकर देव तिवारी

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