*योगी सरकार की पहल: एआई तकनीक से बचेगी कपास की फसल*
*- एआई आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली से होगी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग*
*- कृषि विभाग के अधिकारियों एवं तकनीकी सहायकों को ‘स्मार्ट आईडी’ कराई गई उपलब्ध*
*- सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए ‘येलो स्टिकी ट्रैप’ लगाने की सलाह*
*आगरा, 13 जून।* उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का तेजी से विस्तार कर रही है। इसी क्रम में जिले में कपास उत्पादक किसानों के लिए कृषि विभाग ने कीट प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर समय रहते फसल का उचित प्रबंधन करने की सलाह दी गई है, ताकि वे अपनी मेहनत का बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
*एआई आधारित प्रणाली से मिलेगी सटीक जानकारी*
किसानों को त्वरित लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से नवीनतम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) लागू की गई है। इस अत्याधुनिक प्रणाली के माध्यम से खेतों में कीटों और रोगों के प्रकोप की रीयल-टाइम निगरानी की जा रही है। जनपद स्तर पर योगी सरकार की मंशा के अनुरूप कृषि विभाग के अधिकारियों एवं तकनीकी सहायकों को ‘स्मार्ट आईडी’ उपलब्ध कराई गई है, ताकि इस प्रणाली का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन कर किसानों को सही समय पर बचाव के वैज्ञानिक सुझाव दिए जा सकें।
*हानिकारक कीटों पर निगरानी और प्रारंभिक रोकथाम*
मौसम में हो रहे बदलावों के कारण फसलों में बीमारी का खतरा बना रहता है। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में कपास की फसल में सफेद मक्खी, माहू, जैसिड, थ्रिप्स और गुलाबी सुंडी जैसे हानिकारक कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में किसान नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करते रहें। खेतों में अनावश्यक नमी और खरपतवार बिल्कुल न होने दें तथा कीटों को फंसाने के लिए ‘पीले चिपचिपे ट्रैप’ (येलो स्टिकी ट्रैप) के साथ-साथ संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें।
*शाम के समय करें कीटनाशकों का सुरक्षित छिड़काव*
कीट प्रबंधन के उपायों पर जोर देते हुए जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने किसानों को विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि गुलाबी सुंडी की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए खेतों में फेरोमोन ट्रैप अवश्य लगाएं। किसान भाई दवाओं का छिड़काव हमेशा शाम के समय ही करें और एक ही दवा का बार-बार प्रयोग करने से बचें। उन्होंने अपील की है कि छिड़काव करते समय अपनी सुरक्षा के लिए दस्ताने और मास्क जरूर पहनें। किसी भी प्रकार के रोग की स्थिति में किसान तुरंत निकटतम कृषि विभाग कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर विशेषज्ञों से तकनीकी परामर्श ले सकते हैं।









