बड़े अधिकारी की बड़ी सोच: माननीय जनपद न्यायाधीश ने अधीनस्थ कर्मचारी को दिया वाटर कूलर उद्घाटन का सम्मान
केंद्रीय नाजिर विजयेंद्र गुप्ता को अचानक उद्घाटन के लिए बुलाया तो छलक उठे आंखों से आंसू, अधिकारियों-कर्मचारियों ने की सराहना
एटा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सेशन्स हाउस में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी पल देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का दिल जीत लिया। यह अवसर था सेशन्स हाउस में लगाए गए वाटर कूलर के उद्घाटन का।
स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के उपरांत माननीय जनपद न्यायाधीश श्री राकेश धर दुबे द्वारा सेशन्स हाउस में कार्यरत कर्मचारियों, पुलिस गार्ड तथा वहां आने वाले आगंतुकों की सुविधा के लिए ठंडे एवं गर्म पानी की व्यवस्था हेतु वाटर कूलर का उद्घाटन कराया जाना था।
इसी दौरान माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय ने अचानक केंद्रीय नाजिर श्री विजयेंद्र गुप्ता को अपने पास बुलाया और उनसे कहा—“गुप्ता जी, आज इस वाटर कूलर का उद्घाटन आपको ही करना है।”
माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय के इस अप्रत्याशित निर्णय से श्री विजयेंद्र गुप्ता कुछ क्षण के लिए आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने संकोचपूर्वक कहा, “सर, मैं कैसे उद्घाटन कर सकता हूं?” इस पर माननीय जनपद न्यायाधीश श्री राकेश धर दुबे ने सहज भाव से कहा—“क्यों नहीं कर सकते? आप भी तो हमारे कर्मचारी हैं।”
इतना सुनते ही श्री विजयेंद्र गुप्ता की आंखों में भावुकता के आंसू छलक आए। उनके लिए यह केवल वाटर कूलर का उद्घाटन नहीं, बल्कि उनके सेवाकाल में मिला एक ऐसा सम्मान था, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।
एक ओर जहां आमतौर पर महत्वपूर्ण अवसरों पर उद्घाटन के लिए बड़े पदाधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं माननीय जनपद न्यायाधीश श्री राकेश धर दुबे ने अपने अधीनस्थ कर्मचारी को सम्मान देकर यह संदेश दिया कि पद छोटा-बड़ा हो सकता है, लेकिन किसी कर्मचारी की गरिमा और सम्मान छोटा नहीं होता।
माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय द्वारा केंद्रीय नाजिर श्री विजयेंद्र गुप्ता को इस प्रकार सम्मान दिए जाने की वहां मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। उपस्थित लोगों का कहना था कि एक बड़े अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारी को परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देना वास्तव में प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस पूरे प्रसंग ने यह साबित किया कि एक अधिकारी की महानता केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और अपने कर्मचारियों के प्रति सम्मान से भी तय होती है।
माननीय जनपद न्यायाधीश श्री राकेश धर दुबे का यह कदम न केवल वहां मौजूद कर्मचारियों के लिए खुशी और गर्व का विषय बना, बल्कि कार्यस्थल पर सम्मान, समानता और मानवीय संवेदनशीलता की एक मिसाल भी कायम कर गया।













