पत्रकारिता के पतन का कारण क्या ?

*पत्रकारिता के पतन का कारण क्या ?*

 

भारत की पत्रकारिता त्याग समर्पण और बलिदान के साथ संघर्ष की जीवित मिशाल रही हैं, लेकिन बदलते परिवेश में पत्रकारिता की दिशा और दशा दोनों दूषित मानसिकता वादियों की बजह से बदल गयी हैं, बजह सिर्फ मूल उद्देश्यों से भटके सही पत्रकारों का मौन रहना और अराजक तत्वों की बड़ी घुसपैठ होना हैं, जिससे पत्रकारिता की गरिमा निरन्तर गिरती ही जा रही हैं, बाबजूद इस दुर्दशा के प्रति न पत्रकार चिंतित हैं और न पत्रकार संगठन । कारण पत्रकारिता में अराजक तत्वों का बड़ी संख्या में घुसपैठ हुआ हैं, जिसके मुख्य निम्न कारण हैं …

 

पहला

पब्लिक – जो यही समझ नही पाती कि किसको समर्थन और किसे अनदेखा किया जाए ।

 

दूसरा शासन प्रशासन –

जो निष्पक्षता के बजाए चाटुकारों को वरीयता देता हैं ।

 

तीसरा

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया

जो अपनी सकारात्मक शक्तियों और जिम्मेदारियों का निर्वहन नही करता ।

 

चौथा

स्वयं पत्रकार एवं संगठन –

इस क्षेत्र में अराजक तत्वों, अवैध कारोबारियों और अपराधियों द्वारा घुसपैठ करना और उनके कृत्यों की स्वयं पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों द्वारा अनदेखी करना ।

 

पाँचवा

पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े लोगों में स्वार्थ, अहंकार और अज्ञानता के मार्ग पर बढ़ने की होड़ ।

 

छटा

कॉपी पेस्ट, AI, फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्यूटर, यूट्यूब आधी शोसल साइटों पर मनमानी करने वाले ऐसे अज्ञानी जो स्वयं को ही, लोकतंत्र के चारों स्तम्भ न्याय पालिका, कार्यपालिका विधायका और मीडिया समझ लेते हैं ।

 

*जबकि असल पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सही का समर्थन और गलत का विरोध करना हैं, बाकी जिस दिन सही पत्रकार अपने मूल उद्देश्यो पर काम करने लगेंगे उस दिन पत्रकारिता लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ होगा ।*

 

*-एडीटर मनसुख टाइम्स/राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ*

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