महान क्रांतिकारी की, जिनके सामने झुककर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नमन किया था। उस महान क्रांतिकारी का नाम था—आलेख निशाकांत शर्मा एडवोकेट

आज बात उस महान क्रांतिकारी की, जिनके सामने झुककर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नमन किया था। उस महान क्रांतिकारी का नाम था—

 

कर्नल निज़ामुद्दीन।

कौन थे कर्नल निज़ामुद्दीन?

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे ‘सैफुद्दीन’, जिन्हें दुनिया ‘कर्नल निज़ामुद्दीन’ के नाम से जानती है, आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सबसे भरोसेमंद ड्राइवर और बॉडीगार्ड थे। नेताजी उन्हें प्यार से ‘कर्नल’ कहकर पुकारते थे।

 

जंग के दौरान जब दुश्मन ने नेताजी की गाड़ी पर गोलियों की बौछार कर दी, तो बिना एक पल सोचे निज़ामुद्दीन ने अपनी गाड़ी को नेताजी के आगे ढाल की तरह खड़ा कर दिया। अपने सीने पर 3 गोलियां खाईं, लेकिन नेताजी की रक्षा की।

 

दशकों तक गुमनामी में जीने वाले इस नायक की पहचान तब सामने आई, जब 2014 में वाराणसी की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके बारे में पता चला। पीएम मोदी ने मंच से नीचे उतरकर न केवल उनके पैर छुए, बल्कि उनका आशीर्वाद लिया।

इस घटना के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं सोशल मीडिया (X) पर लिखा था:

“कर्नल निज़ामुद्दीन से मिलना मेरे लिए एक बहुत ही प्रेरणादायक पल था। आजाद हिंद फौज में उनके योगदान और उनके साहस के किस्से आज भी हमारे युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।”*

 

2017 में 117 वर्ष की आयु में इस महान योद्धा ने अंतिम सांस ली। मरते दम तक उनके मन में नेताजी और भारत माता के लिए वही अटूट निष्ठा बनी रही।

आज के दौर में हम फिल्मी सितारों को तो जानते हैं, लेकिन क्या हमें अपने इन असली हीरोज़ के बारे में पता है? आइए, इस गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाएं।

अगर आप भी ‘नेताजी के इस वफादार सिपाही’ को सलाम करना चाहते हैं,

“क्या आपको लगता है कि ऐसे महान नायकों को इतिहास में वह सम्मान मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था? ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में जवाब दें।”

“अगर आप अपने देश के असली हीरोज़ को नमन करना चाहते हैं, तो बस एक बार ‘जय हिंद’ लिखें।”

“इस पोस्ट को अपने एक दोस्त के साथ शेयर करें ताकि उन्हें भी हमारे महान इतिहास का पता चल सके।”

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