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रांची के अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का बिल 22 लाख, 40 दिन तड़पाकर 18 साल के मासूम की ले ली जान, BMFNEWS

क्या पैर की हड्डी जोड़ने के लिए डॉक्टरों ने कुबेर का खजाना पिघलाकर पैर में भरा था?रांची के अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का बिल 22 लाख, 40 दिन तड़पाकर 18 साल के मासूम की ले ली जान।

इसे लापरवाही कहें या अंधा लालच कहें ,,, यह कहानी लातेहार के रहने वाले 18 साल के राजू कुमार रंजन की है, जो अस्पताल तो अपने पैर की हड्डी जुड़वाने आया था, लेकिन 40 दिनों की प्रताड़ना और 22 लाख रुपये का मर्डर बिल चुकाने के बाद उसकी लाश बाहर आई।

बिल का यह आंकड़ा देखकर दिमाग सुन्न हो जाता है—क्या पैर की हड्डी जोड़ने के लिए डॉक्टरों ने कुबेर का खजाना पिघलाकर पैर में भरा था? बिल भरने के बाद जब रोते-बिलखते माता-पिता ने इंसाफ मांगा, तो अस्पताल प्रबंधन ने संवेदना दिखाने के बजाय बाउंसरों के दम पर उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। इस अमानवीय कृत्य के बाद पूरे सूबे का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

राजू को एक मामूली सड़क हादसे के बाद पैर में फ्रैक्चर की वजह से भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने दावा किया था कि वह कुछ ही दिनों में दौड़ने लगेगा। लेकिन भर्ती करने के बाद शुरुआती दो-तीन दिनों तक मरीज के जख्म की ठीक से ड्रेसिंग तक नहीं की गई।

लापरवाही के कारण पैर का घाव अंदर ही अंदर सड़ गया और उसमें भयंकर इंफेक्शन फैल गया।

जब डॉक्टरों को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने अपनी गर्दन बचाने और बिल का मीटर तेजी से घुमाने के लिए राजू को आनन-फानन में वेंटिलेटर और आईसीयू में डाल दिया।

बिना जरूरत के दर्जनों महंगे टेस्ट, गैर-जरूरी दवाइयां और भारी-भरकम सिंडिकेट का यह खेल 40 दिनों तक चला। जब तक परिवार कुछ समझ पाता, उनका बच्चा घुट-घुट कर दम तोड़ चुका था और हाथ में था 22 लाख का वो पर्चा, जिसने उस हंसते-खेलते परिवार को जीते-जी श्मशान बना दिया।

 

यह इलाज नहीं, संगठित अपराध है।

इस घटना ने देश के हर उस मध्यमवर्गीय और गरीब इंसान के डर को सच साबित कर दिया है जो अस्पताल जाने से कतराता है। आज आम आदमी बीमारी से नहीं, अस्पताल के काउंटर पर मिलने वाले इस कागजी वीसा यानी मर्डर बिल से डरता है। अस्पताल अब जीवनदान का मंदिर नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट सेल्स मैनेजर्स की दुकान बन चुके हैं, जहाँ ग्लूकोज की 50 रुपये की बोतल अंदर जाते ही हज़ारों का अमृत बन जाती है।

इस लुटेरे अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से हमेशा के लिए रद्द होना चाहिए।इलाज के नाम पर हत्या और जबरन उगाही का क्रिमिनल केस अस्पताल के मालिकों पर दर्ज होना चाहिए।

पीड़ित गरीब परिवार को कोर्ट के माध्यम से पाई-पाई का हर्जाना दिलवाया जाना चाहिए।

 

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