नीट परीक्षा में कुछ लड़कियां मात्र 2 से 5 मिनट लेट हो गई , परीक्षा केंद्र का गेट बंद हो चुका था , गेट पर खड़ी होकर लड़किया रोने लग गई क्योंकि उनका सीधा सीधा एक साल खराब होने जा रहा था , कभी चीख पुकार की मगर एंट्री नहीं हो पाई
वहा तैनात अफसरों ने कहा रूल इज रुल , मतलब जो नियम हमने बनाए है उनका ही पालन होगा , अब आपको एंट्री नहीं मिलेगी , चाहे रोओ चिल्लाओ चीखों
लेकिन जिन बच्चों के मात्र 2 से 5 मिनट लेट होने पर एंट्री नहीं होने दी जाती , वहीं बच्चे उस ट्रेन से परीक्षा सेंटर पहुंचे है जो आज 1 घंटा लेट थी , उसी बस से पहुंचे है जो आज 30 मिनट लेट थी
उस रोड से चलकर पहुंचे है जिसमें पानी भरा पड़ा था और गड्ढे ही गड्ढे थे , उस सड़क से पहुंचे है जहां 2 – 2 घंटे जाम लगा रहता है उन हवाई जहाजों से पहुंचे है जोकि 3 – 3 घंटे लेट हो चुके थे
उन गांव से दौड़े है जहां सीधी बस या रेल तक नहीं जाती है
और वो परीक्षा देने पहुंचे है जो सरकार की नाकामी के कारण पेपर लीक के कारण सरकार को रदद करनी पड़ी थी , ये वो परीक्षा है जो 18 बच्चों की जिंदगी का बलिदान ले चुकी है
किसने जिम्मेदारी ली ?
किसने माफी मांगी ?
किसका इस्तीफा हुआ ?
कोई पहुंचा उन परिजनों तक जिनके बच्चे सुसाइड कर गए ?
फिर नियम केवल इन बच्चों को लिए है इतने सख्त क्यों है भाई , उनके लिए क्यों नहीं जो इस व्यवस्था के जिम्मेदार है जहां 2 घंटे में पहुंचा जा सकता है बच्चा घर से 4 घंटे पहले चलता है लेकिन फिर भी बस , ट्रेन , गड्ढे ,पानी , एयर लेट के कारण नहीं पहुंच पाता है तो , जिम्मेदारी किसकी है
आप 8 बजे का टाइम रख दीजिए , और अंदर एंट्री करने लग जाईए बच्चों की , मगर परीक्षा 10 बजे स्टार्ट कीजिए , गेट पर आया कोई मासूम बच्चा बिना परीक्षा दिए बापिस नहीं जाना चाहिए ,
8 बजे का टाइम रखोगे तो बच्चे वही फॉलो करके घर से निकलेंगे , अंदर बिठा लीजिए उनको कुछ समय , ज्यादा से ज्यादा बच्चे 10 से 20 मिनट लेट होंगे बस इससे ज्यादा नही









