670 बोरी यूरिया घोटाले पर बवाल: SDM के सामने फंदा लहराकर भाकियू नेता की चेतावनी, “बड़े मगरमच्छ बचाए गए तो आंदोलन होगा उग्र”

*670 बोरी यूरिया घोटाले पर बवाल: SDM के सामने फंदा लहराकर भाकियू नेता की चेतावनी, “बड़े मगरमच्छ बचाए गए तो आंदोलन होगा उग्र”*

 

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*

एटा/जलेसर। जलेसर में 670 बोरी सरकारी यूरिया की कालाबाजारी के मामले को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष ठाकुर पंकज सिंह ने अपनी गर्दन में फंदा डालकर प्रशासन के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया और चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि बंद पड़ी फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में सरकारी यूरिया कालाबाजारी के लिए निकाला जा रहा था। उनका दावा है कि पुलिस कार्रवाई केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रही, जबकि कथित मुख्य सूत्रधारों को बचाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों ने कथित रूप से भारी धनराशि देकर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया। *हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से भी इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई है।*

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं, जबकि भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। उन्होंने लेखपालों पर भी किसानों के उत्पीड़न, रिश्वतखोरी और मनमानी के आरोप लगाए तथा पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान पंकज सिंह ने भावनात्मक रूप से कहा कि यदि किसानों को न्याय नहीं मिला और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

अब इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि वास्तव में यूरिया की कालाबाजारी हुई तो उसका मास्टरमाइंड कौन है? क्या जांच केवल छोटे लोगों तक सीमित रहेगी या बड़े जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचेगी? क्या किसानों के हितों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी?

फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रदर्शन और लगाए गए आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है तथा किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

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