40 साल बाद खुला चंबल के उसैत घाट का रास्ता
-यूपी के वन विभाग ने दी एनओसी, निर्माण कार्य पकड़ेगा गति
पिनाहट (आगरा)। चंबल नदी के उसैत घाट पर पिछले 40 साल से अटका बहुप्रतीक्षित पुल निर्माण अब गति पकड़ेगा। उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के साथ ही इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। घपलों में उलझा था पुल। इसकी आधारशिला साल 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी। योजना के तहत केंद्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार को मिलकर इसे बनाना था। मगर यह परियोजना आधिकारिक रिकॉर्ड के ‘घोषणा सेक्शन’ में दर्ज न होने के कारण कागजी भंवर में फंस गई। सूत्रों के अनुसार, उस दौरान इस कार्यक्रम और पुल के लिए आवंटित बजट को ‘दस्यु उन्मूलन’ (डाकुओं के खात्मे) अभियान में डाइवर्ट कर दिया गया था। जिससे 2017 तक काम ठप रहा। एमपी ने बनाया आधा पुल, यूपी में अड़ा था वन विभाग। साल 2017 में मध्य प्रदेश सरकार ने इच्छाशक्ति दिखाते हुए बीड़ा उठाया और अपनी सीमा में पुल का निर्माण पूरा कर दिया। लेकिन जैसे ही काम उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचा, वन विभाग के कड़े नियमों के कारण एप्रोच रोड का काम रुक गया। सालों तक आधा बना पुल सरकारी उदासीनता की कहानी बयां करता रहा। उच्च स्तरीय समन्वय से मिली राहत। गतिरोध तोड़ने के लिए मुख्य अभियंता (भोपाल) ने आगरा के जिलाधिकारी से संपर्क साधा। जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी और वन क्षेत्राधिकारी के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद आखिरकार वन विभाग ने लंबे समय से लंबित एनओसी को मंजूरी दे दी। जल्द शुरू होगा आवागमन। इस एनओसी के मिलने से उत्तर प्रदेश की सीमा में भी पहुंच मार्ग का निर्माण तेजी से पूरा किया जा सकेगा। इससे आगरा और मध्य प्रदेश के बीच की दूरी बेहद कम हो जाएगी। स्थानीय व्यापार, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र को इससे भारी बढ़ावा मिलेगा।













