कवि सम्मेलन में बही रसधार
नागरी प्रचारिणी सभा में सम्मान समारोह आयोजित
आगरा। नागरी प्रचरिणी सभा में हिंदी साहित्य सभा के बैनर तले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन सफलता पूर्वक हुआ। इस अवसर पर आगरा के वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र गोस्वामी एवं कवि समाजसेवी पर्यावरणविद् मुन्नालाल मिश्रा का मुख्य अतिथि शॉल, माला, पटका तथा अभिनन्दन पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी ने की। इससे पूर्व माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार गोयल एवं विशिष्ट अतिथि ओम ठाकुर, डॉक्टर महेश धाकड़ कवियों के हाथों संपन्न हुआ। सरस्वती वंदना कवयित्री रजिया बेगम जिया ने की। शिकोहाबाद के व्यंग्यकार अरविन्द तिवारी के व्यंग्य समाज की विद्रूपताओं पर आधारित रहे। वहीं, आगरा के वरिष्ठ साहित्यकार शीलेन्द्र वशिष्ठ के गीत खूब सुने गये।
शांत… निश्चल… क्षितिज पट निस्तब्ध है
बहता मधुर मलयज दिशाएं मौन सूरज ढल रहा है
संक्रमण का द्वंद्व भीतर पल रहा है!
इन्दौर के हास्यव्यंग कवि सत्येन वर्मा ने कहा-
शहर की गलियाँ शहर की राहें चौराहे सब जाने हैं
हम आवारा अपने शहर के सारा शहर हमें जाने है
धोखा देना घोखा खान सीख गये हैं
शहर के लोग शहर में रहकर हमने जान दूर के ढोल सुताने हैं।
अनेक विषयों पर करारे व्यंग्य किए। धौलपुर से पधारी कवयित्री रजिया बेगम जिया के श्रृंगार के गीत दिलो दिमाग पर छा गये। उन्होंने कहा- “सुंदर सा इक चित्र हृदय के द्वार टंगा रहता है।
रंग भरो खाली खाली है बात यही कहता है।
फिरोजाबाद के राष्ट्रीय हास्य व्यंग्य कवि की ड़ेढ़ लाझों वाली व्यंग्य क्षणिकाएं खूब सराही गयी। बाह के कवि शिवराम यादव शांति ने एक सवैया प्रस्तुत किया।
पूत कपूत हुए कुछ हैं, सहयोग नहीं करते घर में।
पास पड़ोस करें झगड़ा, हथियार लिए फिरत।









