*ताजनगरी में ‘राम भरोसे’ ट्रैफिक: चौराहों पर रेंगती जिंदगी, स्मार्ट सिटी के दावे जाम में दफन*
आगरा। मोहब्बत की निशानी ताजमहल का शहर आगरा इन दिनों एक नई पहचान से जूझ रहा है—और वो है बेकाबू जाम और चरमराई यातायात व्यवस्था। करोड़ों रुपये खर्च कर स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए हाई-टेक कैमरे और ट्रैफिक सिग्नल महज शोपीस बनकर रह गए हैं। चौराहों से ट्रैफिक पुलिस नजरअंदाज है और वाहन चालक अपनी मर्जी से गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ताजनगरी का यातायात नियंत्रण पूरी तरह ‘राम भरोसे’ चल रहा है।
आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाया गया, लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें या तो बंद हैं या लोग बेखौफ होकर लाल बत्ती पार कर रहे हैं। सड़कों पर अनियंत्रित ई-रिक्शा, डग्गामार वाहन और सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण ने कोढ़ में खाज का काम किया है। जहाँ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को व्यवस्था संभालनी चाहिए, वहाँ वे या तो नजरअंदाज दिखते हैं या किनारे खड़े होकर तमाशा देखते हैं। 2 किलोमीटर जाने में 45 मिनट लगते हैं। कोई नियम देखने वाला नहीं है, सब अपनी मनमर्जी से चल रहे हैं:”करोड़ों का बजट, स्मार्ट सिटी का तमगा और विश्वस्तरीय पर्यटन शहर—लेकिन ज़मीनी हकीकत इन सबसे कोसों दूर है। जब तक ई-रिक्शा के लिए रूट तय नहीं होंगे, अतिक्रमण पर बुलडोजर नहीं चलेगा और चौराहों पर पुलिस की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ताजनगरी की सड़कों पर ऐसे ही ‘राम भरोसे’ सफर कटता रहेगा।













