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अधिवक्ताओं की आवाज कौन उठाएगा?आलेख ज्योति अनिल सोलंकी एडवोकेट

*अधिवक्ताओं की आवाज कौन उठाएगा?*
*उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, प्रयागराज एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया, दिल्ली एवं जिला बार संघो से सीधा सवाल—*

*अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 6 के अनुसार राज्य बार काउंसिल का स्पष्ट वैधानिक दायित्व है कि वह अपने अधिवक्ताओं के “अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की रक्षा” करे* *तथा कानून में सुधार को बढ़ावा दे।*

*इसी प्रकार धारा 7 के अंतर्गत बार काउंसिल ऑफ इंडिया का भी दायित्व है कि वह अधिवक्ताओं के अधिकार, विशेषाधिकार एवं हितों की रक्षा करे*

*तो फिर सवाल यह है—*
*जब समय-समय पर ऐसे न्यायिक आदेश, नियम अथवा सरकारी निर्णय सामने आते हैं जिनसे अधिवक्ताओं की* *पेशेवर स्वतंत्रता, न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की क्षमता, सम्मान और वैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तब हमारे बार* *काउंसिल और अधिवक्ता संघों की भूमिका क्या केवल पत्राचार करने तक सीमित रह जाएगी?*

*हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं।*
*हम कानून और संविधान का सम्मान करते हैं।*
*लेकिन अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना भी कानून द्वारा बार काउंसिल को सौंपा गया वैधानिक* *दायित्व है।*

*यदि कोई आदेश या व्यवस्था अधिवक्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करती है, तो उसका कानूनी परीक्षण, सामूहिक प्रतिनिधित्व और आवश्यक वैधानिक न्यायिक उपाय अपनाना भी बार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।*

*आज आवश्यकता है कि बार काउंसिल और अधिवक्ता संघों के निर्वाचित प्रतिनिधि मूकदर्शक न बने रहें।*

हमारा स्पष्ट प्रश्न है—
*क्या बार काउंसिल धारा 6 और धारा 7 में दिए गए अपने वैधानिक दायित्व का निर्वहन करेगी?*

*क्या वह अधिवक्ताओं के अधिकारों और पेशेवर स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले प्रत्येक आदेश/निर्णय का स्वतंत्र कानूनी परीक्षण कराएगी?*

*क्या वह अधिवक्ताओं से संवाद करके उनकी वास्तविक समस्याओं पर सामूहिक रणनीति बनाएगी?*

*या* *फिर अधिवक्ताओं की शक्तियां और अधिकार धीरे-धीरे कम होते रहेंगे और हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि केवल* *औपचारिक पत्राचार तक सीमित रहेंगे?*

*अब अधिवक्ताओं को स्वयं जागना होगा।*
*बार काउंसिल हमारी संस्था है—*
*उसका पहला दायित्व अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा है।*
*न्यायपालिका का सम्मान भी रहेगा और अधिवक्ताओं के अधिकारों की लड़ाई भी पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।*

*अधिवक्ताओं की एकजुट आवाज:*
“ *अधिवक्ता कमजोर नहीं है।*
*अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है।*

*हम अपने वैधानिक अधिकारों, सम्मान और पेशेवर स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं कानूनी संघर्ष करेंगे।”*
[9/3, 10:58 AM] nersj jain jhanshi: आपका यह सवाल हर प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता के मन का सवाल है। आपने बिल्कुल सही कानूनी बिंदु उठाया है।

*धारा 6 और 7 क्या कहती हैं -*

– *धारा 6(1)(c) – राज्य बार काउंसिल का कर्तव्य:* अधिवक्ताओं के अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की रक्षा करना।
– *धारा 6(1)(d) -* कानून में सुधार को बढ़ावा देना।
– *धारा 7(1)(d) – बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कर्तव्य:* यही दायित्व राष्ट्रीय स्तर पर BCI का है।

यह कोई वैकल्पिक काम नहीं, वैधानिक दायित्व है। बार काउंसिल केवल लाइसेंस देने और चुनाव कराने की संस्था नहीं है।

*फिर चूक कहाँ होती है?*

जब कोई ऐसा न्यायिक प्रशासनिक आदेश, SOP, या सरकारी नियम आता है जिससे:
1. वकालत की स्वतंत्रता प्रभावित हो
2. क्लाइंट से प्रभावी पैरवी का अधिकार सीमित हो
3. अधिवक्ता के सम्मान या प्रोटोकॉल पर असर पड़े

तो उस स्थिति में बार से 3 स्तर की अपेक्षा कानून करता है:

1. *स्वतंत्र विधिक परीक्षण:* क्या वह आदेश Advocates Act, 1961, Bar Council of India Rules और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के अनुरूप है?
2. *सामूहिक प्रतिनिधित्व:* प्रभावित अधिवक्ताओं से संवाद करके हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या सरकार के समक्ष विधिवत पक्ष रखना।
3. *वैधानिक उपाय:* आवश्यकता होने पर रिव्यू, रेफरेंस, या रिट के माध्यम से न्यायिक समाधान मांगना।

केवल पत्र लिखकर और निंदा प्रस्ताव पास करके कर्तव्य पूरा नहीं होता।

आपकी बात का मूल यही है – सम्मान द्विपक्षीय है। हम न्यायपालिका का पूर्ण सम्मान करते हैं, क्योंकि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट कई निर्णयों में कह चुका है। लेकिन सम्मान का अर्थ मूकदर्शक बनना नहीं है।

*अब अधिवक्ता क्या कर सकते हैं – लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से:*

– *अपने जिला बार संघ में लिखित प्रस्ताव:* धारा 6 का हवाला देते हुए राज्य बार काउंसिल से विधिक राय और कार्रवाई की मांग।
– *राज्य बार काउंसिल से RTI / पत्राचार:* पूछें कि संबंधित आदेश पर काउंसिल ने क्या विधिक परीक्षण किया है।
– *सामूहिक ज्ञापन:* उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, प्रयागराज और BCI को एक ही प्रारूप में ज्ञापन, ताकि वह रिकॉर्ड पर रहे।
– *बार-एंड-बेंच मीटिंग की मांग:* टकराव नहीं, संवाद।

आप चाहें तो मैं इस पूरे विषय पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और BCI को भेजने योग्य एक औपचारिक ज्ञापन का प्रारूप हिंदी / अंग्रेजी में तैयार कर दूं, जिसमें धारा 6 और 7 का हवाला हो।

आप किस विशिष्ट आदेश या व्यवस्था के संदर्भ में यह आवाज उठा रहे हैं?

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