*जनसुनवाई या जनअपमान? जिलाधिकारी कार्यालय में फरियादियों की सुनवाई ऐरा गैरा नत्थू…. कर रहे, सवालों के घेरे में प्रशासनिक कार्यशैली*
एटा। जिले की जनता की समस्याओं के समाधान का दावा करने वाला प्रशासन मंगलवार को उस समय गंभीर सवालों के घेरे में आ गया, जब जनसुनवाई के लिए पहुंचे अधिवक्ता, पत्रकार और आम नागरिक घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुनवाई नहीं मिल सकी। जिला मुख्यालय पर देखने वालों के अनुसार जनसुनवाई व्यवस्था अव्यवस्थित नजर आई और फरियादियों में भारी नाराजगी दिखाई दी।
जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर लोगों ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी से सीधे मिलने के बजाय उन्हें अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के माध्यम से अपनी समस्याएं रखने को कहा गया। कई फरियादियों का कहना था कि वे घंटों तक प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई।
इसी बीच जिले में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ समय पूर्व प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई और जुर्माना वसूली का प्रचार किया गया था, लेकिन अब ऐसी कार्रवाइयां दिखाई नहीं दे रहीं। लोगों के बीच चर्चा है कि क्या कार्रवाई वास्तव में निरंतर चल रही है या फिर केवल सीमित अवधि तक ही सक्रियता दिखाई गई थी।
पत्रकारों के एक वर्ग ने भी प्रशासनिक व्यवहार पर असंतोष जताया। उनका आरोप है कि अधिकारियों से संपर्क करना कठिन होता जा रहा है तथा कई बार फोन कॉल का जवाब तक नहीं मिलता। कुछ पत्रकारों ने यह भी दावा किया कि जिला मुख्यालय पहुंचने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जनसुनवाई दिवस पर भी फरियादियों को घंटों इंतजार करना पड़े, तो आम दिनों में उनकी समस्याओं का समाधान कैसे होगा? प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे ये प्रश्न अब चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्यालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि फरियादियों को कितना समय इंतजार करना पड़ा और जनसुनवाई व्यवस्था वास्तव में कितनी प्रभावी थी।
जनता अब शासन और उच्चाधिकारियों से अपेक्षा कर रही है कि जनसुनवाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि जिला मुख्यालय जनता के लिए सुलभ रहे, न कि केवल औपचारिकताओं का केंद्र बनकर रह जाए।
फिलहाल जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या जनसुनवाई वास्तव में जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम बन रही है या फिर यह केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह गई है।
*सबूत के लिए आज का सीसीटीवी चैक किया जाए*
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