हाथरस: पत्रकार वेद प्रकाश शर्मा की निर्मम हत्या से आक्रोश; पुलिस की लापरवाही पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा

निशाकांत शर्मा की खास रिपोर्ट

  • भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने उच्च स्तरीय जांच करने की उठाई मांग साथ में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ हो बड़ी कार्रवाई

हाथरस उत्तर प्रदेश। जिले में पत्रकार सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत एक बार फिर पत्रकार वेद प्रकाश शर्मा उर्फ सोनू की नृशंस हत्या के रूप में सामने आई है। शहर के दिल्ली वाला मोहल्ला निवासी पत्रकार सोनू की हत्या से पूरे जनपद के मीडिया जगत में भारी आक्रोश है। आरोप है कि घटना के पांच दिन पूर्व ही उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए सदर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने संवेदनहीनता दिखाते हुए उसे नजरअंदाज कर दिया।
पुलिस की लापरवाही से हुई मौत?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस घटना की भयावहता को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या से पूर्व उन्हें 4 से 5 घंटे तक बेरहमी से प्रताड़ित किया गया, जिससे उनकी सात हड्डियां टूट गईं। यदि समय रहते पुलिस ने उनकी दी गई शिकायत पर कार्रवाई की होती, तो यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।
पत्रकारों का प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के विरोध में ‘ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन’ के जिलाध्यक्ष शम्भूनाथ पुरोहित के नेतृत्व में सैकड़ों पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने हत्यारों की गिरफ्तारी और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई।
पत्रकारों के भारी दबाव के बाद SP चिरंजीव नाथ सिन्हा ने सख्त रुख अपनाते हुए:
संबंधित चौकी इंचार्ज और बीट आरक्षी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
सदर कोतवाली प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए।
हत्यारों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमों का गठन किया।
फांसी की सजा की उठी मांग
इस घटना पर ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ नेशनल कोर कमेटी ने गहरा शोक और आक्रोश व्यक्त किया है। संस्था के संस्थापक ए.के. बिंदुसार सहित यूनियन के सभी मीडिया अधिकारी एवं अधिकारियों ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि, “पीड़ित पत्रकार ने प्रशासन से पहले ही सुरक्षा की गुहार लगाई थी। पुलिसकर्मियों की लापरवाही ने अपराधियों को खुली छूट दी, जो अक्षम्य है। हम मांग करते हैं कि हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।”थे
न्याय की मांग (Seeking Justice): पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पर निरंतर दबाव बनाए रखना।
प्रशासनिक जवाबदेही (Administrative Accountability): पुलिस की उस लापरवाही को उजागर करना जिसके कारण एक पत्रकार की जान गई, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार या नागरिक की शिकायत को प्रशासन नजरअंदाज न करे।
पत्रकार सुरक्षा का मुद्दा (Journalist Safety): प्रदेश स्तर पर ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ और सुरक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाना।
जन जागरूकता (Public Awareness): समाज को यह बताना कि कैसे एक ‘सच्चाई की आवाज’ को दबाने का प्रयास किया गया और इसे एक बड़े सामाजिक मुद्दे के रूप में स्थापित करना।
संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन: भारतीय मीडिया फाउंडेशन की सक्रियता और पत्रकारों के एकजुट होने की ताकत को प्रदर्शित करना।

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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