गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती के उपलक्ष्य में कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती की एटा( ब्रज प्रांत) शाखा ने’ संस्कार भारती पब्लिक स्कूल,पुलिया गर्वी पर काव्य संध्या का आयोजन किया। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वल के बाद वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष मुकेश मिश्र ने संस्कार भारती के ध्येय गीत ‘साधयति संस्कार भारती भारते नव जीवनम् ‘का सामूहिक वाचन कराया।
मुख्य अतिथि आचार्य प्रेमी राम मिश्र ने तुलसी के राम के विराट व्यक्तित्व का इस प्रकार परिचय कराया -धर्म रूप श्री राम सदा ही जीवन बोध कराते हैं। चारित्रिक मूल्यों के प्रहरी खुद उपमान बनाते हैं।। मानवता के रक्षक हैं वे विनय शीलता के पालक। हिंदुस्तांके नाज बने वे मर्यादा सिखलाते हैं।।कविवर दिनेश प्रताप सिंह चौहान ने तुलसीदास का गौरव गान करते हुए कहा-मां वाणी मेधा बने हों सब देव सहाय। बने बृहस्पति लखनी तब तुलसी बन पाय।।विनय प्रताप सिंह चौहान ने गोस्वामी जी के महत्व पर कविता सुनाई -तुलसी केवल नाम नहीं है भक्ति का उजियारा है। रामचरितमानस रचना से भारत का ध्रुव तारा है।।प्रदीप तोमर ने कहा- सुन्दर पावन👍 मानस लिखकर जग का अज्ञान मिटाया है, सरल सरस भाषा में सबको, राम कथा समझाया है, घर घर पहुँचे राम लखन माता सीता के पावन गुन, तुलसी ने डूबते मानुस को जीना भी सिखलाया है। वरिष्ठ कवि अनूप भावुक,अशोक कुमार चौहान ,डॉ. राकेश चंद्र सिंह ,प्रेमबाबू कुशवाह ने रामचरित मानस के आधार पर
राम की महिमा के विषय में विचार प्रस्तुत किए। विख्यात कवि डॉ राकेश मधुकर ने अपने भावपूर्ण राष्ट्रीय चेतना संपन्न गीतों से वातावरण में सस्ता घोल दी।
डॉ सुधीर पालीवाल ने कहा, बेचकर ईमान अपना धन कमाने में लगे हैं, अनगिनत चेहरे लिए वो सामने आने लगे हैं।
महेश मंजुल ने कहा, कविता लिखता कवि दिल खोल, ज्ञानी समझे जिसका मोल। प्रथम परमार ने राम की भक्ति पर भजन प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया
इस अवसर पर में प्रांतीय मंत्री मयंक तिवारी, प्रथम परमार, सूर्यकांत परमार, अभिषेक पाराशर एड. आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन महेश मंजुल ने किया।













