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प्रेरक है शिक्षा एवं क्रांति के लिए अक्षर पुरुष का अग्निपथ, जयंती के शताब्दी समारोह में संस्थापक प्राचार्य बीएल तिवारी की स्मारिका वितरण, आशुतोष नेहरू को मिला बीएल तिवारी अवार्ड, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

प्रेरक है शिक्षा एवं क्रांति के लिए अक्षर पुरुष का अग्निपथ, जयंती के शताब्दी समारोह में संस्थापक प्राचार्य बीएल तिवारी की स्मारिका वितरण, आशुतोष नेहरू को मिला बीएल तिवारी अवार्ड।

अगले वर्ष से पुण्य तिथि से प्रति वर्ष होगा उनकी याद में सहित्यिक सप्ताह

 

बाह। भदावर पीजी कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य बीएल तिवारी के जयंती समारोह में बुधवार को उनकी शिक्षा एवं क्रांति से जुड़ी हुई यादें ताजा हो गई। इस समय बन बारी लाल तिवारी प्रगति शील शिक्षा प्रसार समिति के महासचिव शंकर देव तिवारी ने घोषणा की अगले वर्ष से यानी पुण्य तिथि पर साहित्यिक सप्ताह विनोद सांवरिया के निर्देशन में आयोजित हुआ करेंगे। इस समय वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा कर कहा कि भदावर क्षेत्र में शिक्षा एवं क्रांति के लिए चंबल के बीहड़ के अग्निपथ पर चले अक्षर पुरुष बीएल तिवारी का संपूर्ण जीवन एक प्रेरक दस्तावेज है। शैक्षिक क्रांति के लिए ब्रिटिश हुकूमत का दमन चक्र झेला, जेल गये, झुके नहीं, डरे न रुके। समारोह में उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को समेटे अक्षर पुरुष स्मारिका का वितरण किया गया। बेटे शंकर देव तिवारी एवं भदावर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने उनसे जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए। कहा कि वह गरीब तबके के लोगों को पढ़ाई से लेकर रोजगार तक में मदद से पीछे नहीं हटे। आने वाली पीढियोंं के लिए उनका व्यक्तित्व प्रेरणा का पुंज है। 9 भाषाओं पर नियंत्रण उनके व्यक्तित्व को रेखांकित करने के लिए काफी है। बीएल तिवारी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने के बाद भदावर कॉलेज में पढ़ कर राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबाल की चमक बिखेरने वाले आगरा विश्व विद्यालय के कप्तान रहे आशुतोष नेहरू को उनके घर पर जाकर बीएल तिवारी अवार्ड प्रदान किया गया। इस दौरान शंकर देव तिवारी, विनोद राजपूत, रामआसरे, श्रीराम, मनोज कुमार, दिलीप कुमार वर्मा, राहुल शर्मा, पंकज अग्निहोत्री, मंसूर अली, मुकेश शर्मा, विशाल चतुर्वेदी, मुकुल तिवारी, प्रीती शर्मा, निधि यादव, रचना चौधरी आदि रहे।

अक्षर पुरुष के नाम से हो शिक्षा नीति

अवार्ड गृहण करने के बाद आशुतोष नेहरू ने कहा कि मुझे उनका नाम मिला आभारी हूँ। वैसे मैं क्या समूचे भदावर क्षेत्र का कोई छात्र हो पुत्र समान होता था। मैं तो उनका ऋणी हूँ जिसे कभी नहीं पटा सकता। उनकी वजह से ही मैं बाह में खेल की फसल होते देखता रहा। जिसकी ही निशानी है विजय सिंह चौहान , अजित भदोरिया जैसे अर्जुन। उन्होंने अक्षर पुरुष की अलग से शिक्षा नीति को सिद्धांत के रूप में स्थापित कराने के लिए बनबारी लाल तिवारी प्रगति शील शिक्षा प्रसार समिति को काम करने के लिए विषय बोध कराया।

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