एटा में होगा देश भर के पत्रकारों और समाजसेवियों का महाकुंभ: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ का बड़ा आयोजन, रिपोर्ट अनिल सोलंकी

*एटा में होगा देश भर के पत्रकारों और समाजसेवियों का महाकुंभ: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ का बड़ा आयोजन*।

 

नई दिल्ली।

 

ए.के. बिंदुसार (मुख्य संयोजक, इंटरनेशनल मीडिया आर्मी एवं संस्थापक, बी.एम.एफ. नेशनल कोर कमेटी),

हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्षों की यात्रा के उपलक्ष्य में भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी द्वारा उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक विशाल ‘महा-सम्मेलन’ एवं ‘पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता सम्मान समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल पत्रकारिता के इतिहास को नमन करने का माध्यम बनेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर संघर्ष करने वाले योद्धाओं के अधिकारों की आवाज भी बुलंद करेगा।

एटा से गूंजेगी पत्रकार सुरक्षा और सम्मान की आवाज।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन की जिला इकाई एटा के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह महा-सम्मेलन वर्तमान पत्रकारिता की चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर केंद्रित होगा। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित होंगी:

पत्रकार सम्मान समारोह: मुख्यधारा की चकाचौंध से दूर, ग्रामीण और जिला स्तर पर अपनी लेखनी से समाज को जगाने वाले कलमकारों का भव्य सम्मान।

समाजसेवी सम्मान: उन सामाजिक कार्यकर्ताओं की हौसला-अफजाई जो बिना किसी शोर-शराबे के मानवीय मूल्यों की रक्षा में जुटे हैं।

नीतिगत चर्चा: पत्रकार सुरक्षा अधिनियम और मीडिया कल्याण बोर्ड के गठन जैसे मुद्दों पर रणनीतिक विचार-विमर्श।

अकादमिक उत्सव बनाम जमीनी हकीकत।

हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी वर्षगांठ (30 मई 2026) के अवसर पर जहाँ बड़े शहरों के वातानुकूलित कमरों और विश्वविद्यालयों में केवल किताबी चर्चाएं हो रही हैं, वहीं भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी एटा की धरती को इस ऐतिहासिक विमर्श के लिए चुना है। संस्था के संस्थापक ए.के. बिंदुसार का मानना है कि पत्रकारिता का असली चेहरा टीवी एंकरों के ग्लैमर में नहीं, बल्कि उन स्ट्रिंगर्स, डेस्क प्रोड्यूसर्स और अखबार के पन्नों पर अपना जीवन खपाने वाले लोगों में है, जो आज भी चुनौतियों से सीधे जूझ रहे हैं।

नेतृत्व और संगठन की भूमिका।

इस महा-सम्मेलन के माध्यम से संगठन यह संदेश देना चाहता है कि पत्रकारिता अब केवल ‘पढ़ाई’ का विषय नहीं, बल्कि एक कठिन ‘प्रशिक्षण’ और ‘तपस्या’ है। एटा का यह कार्यक्रम देश भर के मीडिया कर्मियों और समाजसेवियों को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगा।

> “हम केवल उत्सव मनाने में विश्वास नहीं रखते, हम पत्रकारिता की उस मशाल को सलाम करते हैं जिसे पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने जलाया था और जिसे आज का आम पत्रकार तमाम अभावों के बावजूद जलाए हुए है।”

> — *ए.के. बिंदुसार*

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कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर।

एटा जिला इकाई और नेशनल कोर कमेटी के सदस्य इस महा-सम्मेलन को सफल बनाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। इसमें देश भर के वरिष्ठ पत्रकारों, चिंतकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर की वास्तविक मीमांसा करने वाला एक ऐतिहासिक मंच साबित होगा।

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