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स्मार्ट मीटर की लूट से गांव से लेकर शहर तक मचा हाहाक, रिपोर्ट अनिल सोलंकी

स्मार्ट मीटर की लूट से गांव से लेकर शहर तक मचा हाहाक

उत्तर प्रदेश/एटा

 

स्मार्ट मीटर हर किसी के लिए सिरदर्द बन चुका है, उपभोक्ताओं को राहत, सहूलियत देने की बजाय स्मार्ट मीटर लोगों की जेब लूटने में स्मार्ट साबित हो रहा है। सरकार के संरक्षण में प्राईवेट कम्पनियां स्मार्ट मीटर के नाम पर जमकर उपभोक्ताओं को लूट रही हैं, क्षमता से अधिक आ रहे विधुत बिल की मार से विधुत उपभोक्ताओं में हाहाकार मचा हुआ है, गांव से लेकर शहर तक हर किसी की जुबान पर स्मार्ट मीटर की लूट के चर्चे हैं।

उपभोक्ता चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि स्मार्ट मीटर में इतना अधिक बिल आ रहा है कि उनके बजट से बाहर है कि वो इतना बिल भर पाएं, जब लोग अधिकारियों के पास समस्या लेकर पहुंच रहे हैं तो वहां कोई उनकी नहीं सुन रहा है ऐसे में विधुत उपभोक्ताओं को समझ नहीं आ रहा आखिर इस लूट से कैसे छूटकारा पाया जाए।

स्मार्ट मीटर लगने के बाद अधिक बिल आने पर जब उपभोक्ता अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उनसे बोल दिया जाता है कि पुराने मीटर में आपकी इतनी संख्या में यूनिट शेष हैं उसका बिल है अगर नहीं भरोगे तो ब्याज बढ़ती रहेगी, ब्याज बढ़ने के डर के चलते उपभोक्ता भागा-भागा घर पहुंचता है और किसी से उधार या कर्ज लेकर बिल का भुगतान कर देता है लेकिन इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में लोग कह रहे हैं नये स्मार्ट मीटरों में एक महीने का हजारों रुपए का बिल आ रहा है जबकि उनके घरों में इतनी बिजली इस्तेमाल नहीं होती है।

गरीब- मजदूर जो 400-500 रुपए प्रतिदिन कमाता है और मुश्किल से पूरे महीने में उसे 15-20 दिन ही काम मिल पाता है ऐसे में मजदूर गरीब इतना बिल कहां से भर पाएगा ये बड़ा सवाल है, अगर बिजली का बिल भर भी देता है तो खाएगा क्या और बच्चों को कैसे पढ़ा पाएगा कहीं ना कहीं गरीब- मजदूर के सामने बड़ा संकट खड़ा हो चुका है?

सरकार भले ही इधर उधर की बातें करके लोगों को मूर्ख बना रही है लेकिन सच्चाई यही है कि सरकार ने ही प्राईवेट कम्पनियों को स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता को लूटने का लाइसेंस दिया है और जनता इस खेल को भली-भांति समझ रही है, यही कारण है स्मार्ट मीटर को लेकर जनता में बढ़ता आक्रोश देखकर सरकार ने फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है लेकिन नए विधुत कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं और जिन विद्युत उपभोक्ताओं के घरों पर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं उसे लेकर सरकार की नीति और नीयत संदेह के घेरे में है, अगर समय रहते सरकार ने प्री-पेड स्मार्ट मीटर को बदलकर पुराने पोस्ट पेड प्रक्रिया में नहीं बदला तो यकीनन आने वाले चुनावों में सरकार को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा, स्मार्ट मीटर की लूट जाति-धर्म के मुद्दे पर भारी पड़ रही है क्योंकि इस स्मार्ट मीटर लूट की चपेट में भाजपा के अंधभक्त से लेकर कार्यकर्ता भी आ गए हैं। स्मार्ट मीटर का विरोध जमीनीस्तर पर बड़ा रुप ले चुका है यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि इस स्मार्ट मीटर लूट के विरोध में भाजपा के कार्यकर्ता भी जमकर आवाज उठा रहे हैं क्योंकि भाजपा की गरीबों को लूटने की नीति अब भाजपा के कार्यकर्ताओं की चौखट तक दस्तक दे चुकी है।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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