मैं चुप्प रहूँगी! हम भी चुप्प रहेंगे । देश ऐसे ही चलता रहेगा? ——- मनोहर चावला

मैं चुप्प रहूँगी! हम भी चुप्प रहेंगे । देश ऐसे ही चलता रहेगा?
——- मनोहर चावला

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एक फ़िल्म आई थी मीनाकुमारी की ॰ मैं चुप्प रहूँगी “— जिसमे उस पर अनेक जुल्म होते है लेकिन वो उफ़ तक नहीं करती। वो एक पारिवारिक फ़िल्म थी। यहाँ तो लंबे समय से रोज़ाना आप सबसे बेतहाशा लापरवाही और उपेक्षापूर्ण व्यवहार हो रहा है और हम भी उफ़ तक नहीं करते और चुप्प है। आपके घर पर कचरा इकट्ठा करने वाला कई कई दिनों तक नहीं आता! आपकी गली- मोहल्ला गंदगी से सराबोर है । आपकी गली में हमेशा कुत्तो का शोर है, कई लोग कुत्तो के काटने से घायल हो चुके है। आपकी गली की स्ट्रीट लाईट नहीं जलती। आपके घर के आगे लोग अपनी कारे खड़ी करते है, फिर भी हम मौन है। घर से बाहर जाने वाली हर सड़क टूटी पड़ी है जर्जर अवस्था मे है उन पर जान लेवा गहरे गड्ढे है। फिर भी हम मौन धारण किए हुए है। रेल फाटको की समस्या ने नगरवासियों का जीना हराम कर रखा है फिर भी कोई कुछ नहीं बोलता। जब आप अपने नगर के विकास और हितों के लिए इतने चुप है तब आपसे नगर विकास की क्या आशा और अपेक्षा की जाए ? हमारा जमीर मर गया है । अब यह आशा नहीं बची कि हम भ्रष्टाचार को समाप्त करने में, भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़वाने में अपनी भूमिका निभा पायेगे? हमारी आवासीय कॉलोनी के घरों में दुकाने बन रही है । पवनपुरी और जय नारायण व्यास कॉलोनी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं । जहाँ आवासीय कालोनी के घरों पर बिना घरों को कमर्शियल कराए होटल, रेस्टोरेंट ,शराब की दुकाने, लेबोरिट्रिया,कोचिंग सेंटर, शो- रूम, मॉल खुल गए हैं । फिर भी हम मौन है? हम में सच्चाई का साथ देने की हिम्मत नहीं हैं, हम में विरोध करने की ताक़त भी नहीं हैं । अतिक्रमण और बहुमंजिला इमारतों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है । क्योंकि सब कार्य सिफ़ारिश और रिश्वत से हो रहे हैं। हम लोगो का जमीर पूरी तरह मर चुका है। शायद इसलिए हम बिल्कुल चुप है और आवाज़ नहीं उठा रहे। क्योंकि ऊपर से नीचे तक एक जैसी ही गंगा बह रही है। नागरिकों में इतनी हताशा और उदासीनता पहले कभी नहीं देखी गई। बिना हेलमेट के वाहन चलाना, मोबाइल फ़ोन कान पर रखकर दुसरे हाथ से कार चलाना, ट्रैफ़िक लाइटो का उल्लंघन , थ्री- व्हीलर्स वालो की मनमानी,, नियमों की खुली अवहेलना हमारा नैतिक कर्तव्य बन गया है। हम भी नहीं सुधरेंगे और न ही हम व्यवस्था को सुधारेंगे? बिना फिटनेस के बस चलायेंगे, फिर यात्रियों को जिंदा जलायेगे ।जगह जगह अस्पताल खोलेंगे और फिर रोगियो की जेब टटोलेगे! डाक्टर अस्पताल की बजाय घर पर ही मरीज़ देखना पसंद करेंगे और घर में खुली अपनी दवाई की दुकान से मनमर्जी दरों पर दवाई लेने को मजबूर करेगे। अपनी कमीशन वाली लैब से अनावश्यक जांचे करवाएगे? लेकिन फिर भी हम बोल नहीं सकते? क्योंकि उनका नेटवर्क बहुत मज़बूत है। और हम चुप रहकर उनको प्रोत्साहित कर रहे है। अब हम समस्त लोगों को मालूम हो चुका है कि इन लोगों का कोई बाल- बाँका भी नही कर सकता! वो चाहे कलेक्टर हो, या पुलिस अधिकारी या निगम, प्राधिकरण अधिकारी या फिर रेवेन्यू, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी आप किसी का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते? ये लोग अमीर और अधिक अमीर बन रहे है और ग़रीब और अधिक ग़रीब? जो ज़्यादा सफ़ेद और धुले हुए दिखाई देते हैं। उन तथाकथित नेताओ का इन पर हाथ रहता है । ख़ुद खाओ और हमे भी खिलाओ ये इनका मकसद होता है ।ये तथाकथित नेता गिरगिट की तरह चेहरे पर चेहरा बदलते रहते हैं।पक्ष – विपक्ष दोनों एक जैसे ही है। अत्त: हमारा मौन रहना ही बेहतर है ?और हमे इंतज़ार करना होगा कि अगले चुनाव में सच्चे, ईमानदार और सही आदमी का चयन कर सके । वो शायद हमे कोई राहत दिला सके।

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