*सिस्टम की संवेदनहीनता ने ली पत्रकार की जान: वीवीआईपी प्रोटोकॉल में एम्बुलेंस फंसने से हुई मौत पर भड़के ‘मीडिया सरकार’ एके बिंदुसार*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक ने शहीद पत्रकार को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए तीखे सवाल।*
नई दिल्ली/रायसेन: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था के चलते तीन घंटे तक एम्बुलेंस जाम में फंसी रही। इस दौरान समय पर उपचार न मिलने के कारण एक बीमार पत्रकार ने अपनी पत्नी की गोद में ही दम तोड़ दिया।
इस घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार (मीडिया सरकार) ने गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को व्यवस्था की ‘सुनियोजित हत्या’ करार देते हुए शहीद पत्रकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
“प्रोटोकॉल के नाम पर इंसानियत का अंत”
एके बिंदुसार ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस वीवीआईपी संस्कृति को खत्म करने के दावे किए जाते हैं, उसी के कारण आज एक कलमकार ने अपनी जान गंवा दी। उन्होंने कहा:
“यह सिर्फ एक एम्बुलेंस का जाम में फंसना नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम की उस संवेदनहीनता का आईना है, जहाँ एक नेता की सुरक्षा और भाषण, एक नागरिक की सांसों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। तीन घंटे तक एम्बुलेंस का जाम में फंसे रहना यह साबित करता है कि शासन का तंत्र पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुका है।”
पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता
इस मामले में स्थानीय मीडिया की भूमिका पर भी एके बिंदुसार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय एक पत्रकार अस्पताल पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहा था, उसी वक्त उसी शहर के कुछ तथाकथित पत्रकार नेताओं के साथ सेल्फी लेने और कार्यक्रम को ‘ऐतिहासिक’ बताने में व्यस्त थे।
“यह कलम का नहीं, बल्कि ‘दरबार’ का युग हो गया है। जब मीडिया का एक वर्ग सत्ता के आगे झुकने में गर्व महसूस करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि समाज की आवाज दबा दी गई है। पत्रकारिता का धर्म सवाल पूछना है, न कि सत्ता की चाटुकारिता करना।”
बीएमएफ की मांग: पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू हो
भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक ने दोहराया कि जब तक देश में ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ और ‘मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड’ का गठन नहीं होगा, तब तक कलमकारों का शोषण और अपमान जारी रहेगा। उन्होंने मांग की कि:
न्यायिक जांच: एम्बुलेंस को जाम में रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
पीड़ित परिवार को मुआवजा: मृतक पत्रकार के परिवार को तत्काल प्रभाव से उचित सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए।
सिस्टम में सुधार: भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए इमरजेंसी सेवाओं (एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड) के लिए अनिवार्य रूप से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ सुनिश्चित किया जाए।
एके बिंदुसार ने अपने संगठन के सभी सदस्यों और देश भर के पत्रकारों से आह्वान किया है कि वे इस घटना के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं और सिस्टम को आईना दिखाने का काम करें।
शोक संदेश:
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्यों ने दिवंगत पत्रकार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। हम इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।







