*थाने का घेराव – कितना सही कितना गलत ?*
भारतीय कानून के अनुसार थाने का घेराव करना गैरकानूनी है। संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन पुलिस स्टेशन जैसे संवेदनशील और जरूरी सरकारी परिसर को घेरना, वहां की आवाजाही रोकना या सरकारी काम में बाधा डालना कानूनी अपराध माना जाता है।
*क्या कहता है भारत का कानून*
अब इस विषय पर भारत के कानून को ऐसे समझिए
*भारत में थाने का घेराव करना या पुलिस स्टेशन के सामने उग्र प्रदर्शन करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189 (गैरकानूनी जमावड़ा), धारा 221 (लोक servant के कार्य में बाधा) और धारा 196/197 (शांति भंग करना) के अंतर्गत गैरकानूनी और दंडनीय अपराध माना जाता है।*
बिना अनुमति के किसी सरकारी इमारत के पास भीड़ इकट्ठा करना या बल प्रयोग करना, दंगा या गैरकानूनी सभा की श्रेणी में आ सकता है।
पुलिस स्टेशन एक प्रतिबंधित/संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र होता है, जहां सामान्य शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस बात को समझिए और अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और लालच के चलते भोली भाली जनता को अपराध की ओर ले जाने वाले तथाकथित फर्जी नेताओं से बचिए l
जब ऐसे तथागत फर्जी नेता आपका इस्तेमाल कर लेते हैं और उसके बाद जब आपके ऊपर कोई कार्यवाही होती है तो ना तो यह नेता आपकी जमानत कराने आते हैं और ना आपके परिवार का ख्याल रखने
इसलिए अपनी बुद्धि का प्रयोग कीजिए और थाने के घेराव जैसे गैर कानूनी काम का समर्थन मत कीजिए l
*पवन चतुर्वेदी*
जिलाध्यक्ष
प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स
एसोसिएशन
एटा













