सेहत की लय बिगाड़ने में बढ़ते तापमान की भूमिका अहम है — ज्ञानेन्द्र रावत

सेहत की लय बिगाड़ने में बढ़ते तापमान की भूमिका अहम है — ज्ञानेन्द्र रावत

दुनिया में तेजी से हो रहे तापमान में बदलाव से सेहत की लय बिगड़ती जा रही है। बदलते मौसम की वजह से तापमान में होने वाले बदलाव कई तरह की चिंतायें जन्म ले रही हैं। दुनिया में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी के दुष्परिणाम स्वरूप आर्कटिक क्षेत्र में वार्मिंग बाकी दुनिया की तुलना में 3.5 गुणा तेजी से बढ़ रही है। सबसे बड़ी बात कि तापमान में मामूली बढ़ोतरी भी जीव-जंतुओं की सेहत की बर्बादी का कारण बन रही है। दरअसल तापमान में बढ़ोतरी का दबाव प्रजातियां, प्रबाल भित्तियां सहन नहीं कर पा रही हैं और अंतत: उनका खात्मा होना शुरू हो गया है । यह कहना है पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत का। चिंता की बात यह है कि वैज्ञानिकों ने कार्बन डाई आक्साइड में हुयी रिकॉर्ड बढ़त और उसके चलते तापमान में होती लगातार बढ़ोतरी से दुनिया में हीटवेव की आशंका व्यक्त की है जो मानव शरीर के लिए अत्याधिक खतरनाक होती है। इसकी चपेट में बच्चे, 60 से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, विशेष रूप से महिलाएं, फेफडो़ं की पुरानी बीमारी वाले, निर्माण और श्रम से जुड़े लोग ज्यादातर आते हैं। फिर पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए इससे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इससे डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और मौत भी हो सकती है।

हालिया शोधों ने गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती भीषण गर्मी की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है। वैलेंसिया, बर्न सहित दुनियाभर के पांच विश्व विद्यालयों द्वारा 3.66 करोड़ प्रसव के विश्लेषण से पुष्टि हुयी है कि तापमान बढ़ने के साथ ही समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल अधिक गर्मी से शरीर पर अत्याधिक दबाव बढता है जिससे गर्भाशय में खिंचाव शुरू हो सकता है, शरीर में पानी की कमी प्रसव पीड़ा को समय पूर्व शुरू कर सकती है। यही नहीं गर्भपात में बच्चे तक आक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाली प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है जो खतरनाक साबित हो सकता है।

यही नहीं बच्चे का बजन सामान्य से कम हो सकता है, फेफड़े पूरी तरह विकसित न हो पाने की स्थिति में सांस की समस्या हो सकती है और समय पूर्व जन्म लेने के कारण बच्चे को नवजात गहन चिकित्सा प्रणाली पर रखना पड़ सकता है। यही वजह है कि अध्ययन कर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं को कड़ी धूप से बचने और पानी पीने की सलाह दी है।

इसके अलावा उच्च तापमान के संपर्क में रहने के कारण गर्भावस्था और प्रारंभिक शिशु अवस्था के दौरान मस्तिष्क के सूचना संसाधन केंद्र थैलेमस की वृद्धि धीमी हो सकती है जिससे मस्तिष्क के विकास की गति स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।

चिंता की बात यह है कि आने वाले दिन और भी भयानक हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र और विश्व मौसम विज्ञान संगठन की चेतावनी के अनुसार अगला साल सबसे गर्म हो सकता है। उनकी ताजा रिपोर्ट सारी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर गर्मी अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। इस दौरान तापमान ऐसे खतरनाक स्तर तक पहुंच जायेगा जिसकी इंसान ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।

इसका प्रमुख कारण है कि योरोप, भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में आज भी भारी मात्रा में कोयला, गैस और तेल का इस्तेमाल हो रहा है। इसके मानवीय और आर्थिक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।

हमारा देश पहले से ही 45 डिग्री तापमान वाले लंबे हीटवेव को झेल चुका है। भविष्य में हीटवेव और लंबी होगी और रात का तापमान भी ज्यादा कम नहीं होगा। ऐसी स्थिति में और सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही सरकारों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। उस स्थिति में यह और भी जरूरी है जबकि संयुक्त राष्ट्र चेतावनी दे चुका है कि आने वाले सालों में साठ करोड़ लोग इसकी चपेट में होंगे और 31 से 48 करोड़ लोगों के जीवन की गुणवत्ता में कमी आयेगी।

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