*शब्दों से परे है परमात्मा – निरंकारी संत*
*एटा 1-7-2026,* आदिकाल से अब तक परमात्मा का यशोगान हम शब्दों के माध्यम से करते आ रहे हैं, फिर चाहे गीत, भजन, कविताएं हो या व्यख्यान, या फिर लेखन के माध्यम से, लेकिन फिर भी परमात्मा का जिक्र करने में मानव ने अपनी असमर्थता जताई है, क्योंकि परमात्मा शब्दों से परे है, जो केवल सतगुरु द्वारा ब्रह्मानुभूति कराने पर प्रकट होता है।
उक्त विचार उत्तराखंड से आए निरंकारी संत श्री महादेव कुडियाल जी (केंद्रीय प्रचारक, स.नि.मि.) ने व्यक्त किए। उनके आगमन पर यहां अवागढ़ के निकटवर्ती गांव कलियान पुर मे निरंकारी सत्संग भावन पर संत समागम का आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने उपस्थित सैंकड़ों श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए मानव जीवन की श्रेष्ठ अवस्था बताई।
उन्होंने कहा कि मृग तृष्णा में भटका हुआ मानव, जीवन पर्यंत तन मन धन को अपना समझ कर इसका अभिमान करता रहता है, परंतु जिस परमात्मा ने यह सारी सौगात मानव को दी है, उसकी पहचान नहीं करता और जब प्रभु को जाना ही नहीं तो प्रभु के प्रति शुकराना कहां करेंगे। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान मानव जीवन की वह श्रेष्ठ अवस्था है जो दुनिया की किसी भी दौलत से नहीं खरीदी जा सकती। परमात्मा प्रेम का प्रतीक है और प्रेम से ही प्रकट होता है, क्योंकि प्रेम बिना भक्ति अधूरी है, जो प्रभु को जानने से ही शुरू होती है।
निरंकारी संत ने कहा कि सभी धर्म ग्रंथ गुरु की महिमा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। पूर्ण गुरु की कृपा से ही मानव की मुक्ति संभव है। सद्गुरू मानव का सच्चा मार्गदर्शन है, जो मानव को ब्रह्म की प्राप्ति कराकर भ्रम की समाप्ति करता है। सतगुरु रास्ता नहीं बताता,अपितु मंजिल तक पहुंचता है। सतगुरु से ब्रह्मानुभूति करना मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म है। परमात्मा जानने योग्य है, वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हर मानव को ब्रह्मबोध करा रहे हैं।
मथुरा से आए जोनल इंचार्ज संत श्री एच के अरोड़ा जी ने कहा कि संत निरंकारी मिशन विश्वभर में सत्य ज्ञान, प्रेम एवं भाईचारे का संदेश दे रहा है। स्थानीय मुखी श्री वीरेंद्र जी ने आगरा, मथुरा, चंडीगढ़, दिल्ली, एटा,जैथरा,धुमरी अलीगंज निधौली कला आदि स्थानों से पधारें भक्तों का स्वागत कर सबका आभार भी जताया।









