रिपोर्ट: शकीर अख़्तर (सोनभद्र)
बभनी (सोनभद्र)। विकासखंड बभनी में प्राथमिक शिक्षा को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से बुधवार को पांच दिवसीय FLN (Foundational Literacy and Numeracy) शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार प्रजापति के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को नवीन पाठ्यक्रम, नई पाठ्यपुस्तकों तथा बच्चों की बुनियादी दक्षताओं के विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

ब्लॉक संसाधन केंद्र बभनी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ शिक्षक मोहम्मद अनीस ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया। इसके साथ ही प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण में शिक्षकों को कक्षा-कक्ष में नई शिक्षण पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
कक्षा-4 की नई पाठ्यपुस्तकों पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र FLN तथा NCERT के नवीन पाठ्यक्रम पर आधारित कक्षा-4 की नई पाठ्यपुस्तकें हैं। शिक्षकों को पुस्तकों की विषयवस्तु, शिक्षण उद्देश्यों और बच्चों की सीखने की क्षमता के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने तथा कक्षा संचालन के तरीके बताए जा रहे हैं।

प्रशिक्षकों का जोर इस बात पर है कि बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि गतिविधि, प्रश्नोत्तर, अभ्यास, खेल एवं बच्चों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को सरल और रुचिकर बनाया जाए।
बच्चों की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने पर जोर
FLN के अंतर्गत बच्चों की भाषाई एवं गणितीय बुनियादी समझ को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया जा रहा है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मजबूत नींव तैयार करना आगे की शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही शिक्षकों को बच्चों में अंतर को समझते हुए शिक्षण रणनीति अपनाने की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में बताया गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति अलग हो सकती है। ऐसे में अपेक्षाकृत कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त अभ्यास एवं सहयोग तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों के लिए उनकी क्षमता के अनुरूप गतिविधियां कराई जानी चाहिए।
चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित होंगे शिक्षक
खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार प्रजापति के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। इसमें विकासखंड के सभी प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षामित्रों को अलग-अलग बैच में प्रशिक्षण दिया जाना है।
प्रशिक्षण का प्रथम बैच पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में दूसरा बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। आगामी चरणों में निर्धारित बैच के माध्यम से विकासखंड के सभी शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
एआरपी दे रहे प्रशिक्षण में मार्गदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम में संदर्भदाता के रूप में एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) भानू प्रताप सिंह, अमित कुमार, चन्द्रशेखर एवं विष्णु दयाल शिक्षकों को विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। वहीं तकनीकी सहयोग के लिए राजू, विजय एवं मुस्तकीम सहित अन्य सहयोगी मौजूद हैं।
संदर्भदाताओं द्वारा शिक्षकों को नई पाठ्यपुस्तकों के विभिन्न अध्यायों को बच्चों के स्तर के अनुरूप समझाने, गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाने तथा कक्षा में बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके बताए जा रहे हैं।
शिक्षकों की भूमिका अहम
प्रशिक्षकों ने कहा कि नई पाठ्यपुस्तकों और नवीन पाठ्यक्रम को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान केवल पाठ्यक्रम की जानकारी देने के बजाय ‘कैसे पढ़ाया जाए’ पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे गतिविधियों और अनुभवों के माध्यम से सीखते हैं तो उनकी समझ अधिक स्थायी होती है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों को सरल, रोचक एवं गतिविधि आधारित शिक्षण तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि FLN एवं नवीन NCERT पाठ्यक्रम के अनुरूप यह प्रशिक्षण प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे बच्चों की भाषा एवं गणितीय समझ के साथ-साथ उनकी तर्क क्षमता, समस्या समाधान कौशल और सीखने के स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों को नई पुस्तकों से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें इस तरह तैयार करना है कि वे प्रत्येक बच्चे की सीखने की जरूरत को समझकर कक्षा में प्रभावी एवं आनंददायक शिक्षण सुनिश्चित कर सकें।














