2 जुलाई, 2024 यानी आज से ठीक 2 साल पहले। हाथरस में सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के आश्रम में भगदड़ मची। 121 लोगों की मौत हो गई। हाथरस पुलिस ने भोले बाबा को छोड़कर आयोजन से जुड़े 11 लोगों को आरोपी बनाया।
घटना के 7 महीने बाद भोले बाबा को क्लीन चिट मिल गई। एक-एक करके आरोपी भी जमानत पर बाहर आ गए। भोले बाबा ज्यादातर 2 आश्रम में रहते थे। एक- बिछुआ (मैनपुरी) का आश्रम। दूसरा- कासगंज के पटियाली का आश्रम। लेकिन भगदड़ के बाद पिछले 2 साल से वो यहां नहीं आए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूपी के 5 जिलों में उनके आश्रमों में रहने वाले सेवादारों से बात की। लेकिन, बाबा की सटीक लोकेशन उन्हें भी पता नहीं थी।
हालांकि, पिछले करीब 6 महीने से भोले बाबा के अनुयायी उनके आश्रमों में पहुंचने लगे हैं। आश्रमों में हर मंगलवार को होने वाले सत्संग में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। वहीं, 121 मौतों के मामले में हाथरस जिला कोर्ट में ट्रायल शुरू हो गया है। अब तक 30 गवाह पेश हो चुके हैं।
मैनपुरी के नारायण साकार हरि आश्रम पहुंचे। बिछुआ गांव का यह आश्रम 21 बीघे में फैला है। इसमें 6 बड़े कमरे सूरजपाल और उनकी पत्नी के लिए रिजर्व हैं।
भगदड़ की घटना होने से पहले भोले बाबा अक्सर यहीं रहते थे। उनके अनुयायी बताते हैं- भगदड़ के बाद बाबा एक बार भी इस आश्रम में नहीं आए। उनके नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में अनुयायी आश्रम आते हैं।
सेंट्रल हॉल में भोले बाबा की गद्दी है। उसके सामने सिर झुकाते हैं। बाबा के खास सेवादार ही इस गद्दी के नीचे बैठकर सत्संग करते हैं। लोग उन्हें सुनते हैं, फिर अपने-अपने शहर लौट जाते हैं।
मुख्य सेवादार विनोद बाबू आनंद से हुई। वह कहते हैं- नारायण साकार हरि (भोले बाबा) पूर्ण ब्रह्म हैं। मैं उनसे 2004 से जुड़ा हूं। वो पिछले 2 साल से यहां नहीं आए हैं। 2 साल से कहीं कोई समागम भी नहीं हुआ है।
इसके पीछे वजह ये है कि शासन-प्रशासन से हमें अनुमति नहीं मिल रही। हमने एक बार प्रशासन से उनके यहां रहने के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन वह भी नहीं मिली। नारायण साकार हरि बिना प्रशासन की अनुमति के यहां नहीं आते हैं।
बाबा के पैतृक गांव बहादुरनगर के उदय सिंह उनके अनुयायी हैं। वे कहते हैं- नारायण साकार हरि से 20 साल से ज्यादा वक्त से जुड़ा हूं। हाथरस में जब घटना हुई, उसके बाद बाबा से कोई मुलाकात नहीं हो पाई। वे कहां हैं, इसके बारे में भी हमें कोई जानकारी नहीं है। हम लोग यहां आते हैं, उनको याद करते हैं, उनका आशीर्वाद हासिल करते हैं।
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