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आज भी नारी के अधिकार एहसान की तरह मिल रहे हैं पर शुक्रिया भाजपा ने शुरू तो किया तो परिणाम भी सामने है–आलेख दीप्ति चौहान

,आज भी नारी के अधिकार एहसान की तरह मिल रहे हैं पर शुक्रिया भाजपा ने शुरू तो किया तो परिणाम भी सामने है–*

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जिसे नारी समझ में नहीं आई उसके लिए बड़ा सिम्पल सा टिप्स है कि बो अपनी प्रोग्रेस को देखें और आंकलन करें फिर चाहे घर हो रिश्ते समाज या देश जिस व्यक्ति के सिर पर नारी का स्नेह और आशीर्वाद होता है उसे ईश्वर भी आशीर्वाद देने के लिए मजबूर हो जाते हैं-

नारी न होती तो पुरुष का कोई अस्तित्व ही नहीं था संसार में नौ महीने की तन्हा कोख की बो परवरिश जो हम भूल गए हैं जिसमें ईश्वर के शिवाय किसी पुरुष या पति विशेष का सहयोग नहीं होता नारी अकेले मानव मूर्ति को बनाती है तिल तिल अपने अंग का हिस्सा खून में माणकर अपने निवाले अपनी सांसों की हवा देकर उसको ओक्सीजन देती है बो तिल तिल उस मूर्ति में खुद को नोच नोच कर मूर्ति को गढ़ती है तब जाकर कहीं नौ महीने पूरे कर उसे संसार में लाने के लिए अंतिम दाव में अपने जीवन को लगा देती है बो,उस पल जब रिश्ते परिवार खुशी के जश्न में नन्हे मेहमान की डूबे होते हैं तब नारी एसे दर्द से तन्हा लड़ रही होती हैं कि पता नहीं खुशी कौन सी बाहर जाएं उसके नौ महीने के संघर्ष की या जीवन की नारी के हृदय की परख यही से शुरू और समाप्त हो जाती है कि उसका त्याग और बलिदान धेर्य महत्व संसार में क्या है बो जननी है संसार का श्रजन करती है उसकी दुआ और बद्दुआ में साक्षात ईश्वर होता है इसे हास्य समझ कर अपनी तबाही खरीदने बाले भूल जाते हैं कि नारी के आगे स्वयं ईश्वर भी उसके रिणी और नतमस्तक है पर इंसास खुदा के आगे खुद को खुदा समझ बैठा है जबकि नारी के बिना इस संसार की कल्पना मात्र व्यर्थ है जिसने संसार की सारी शक्तियों को अपने नाम कर लिया यह उसके त्याग और बलिदान का परिणाम है कौन सा श्रिष मुनि सरस्वती के ज्ञान और आशीर्वाद के शिवाय यहां बिद्धान बन गया पानी की पवित्रता में गंगा यमुना सरस्वती नदियों का महत्व कौन नहीं जानता है बिना लक्ष्मी के जीवन की कल्पना सोच कर देखिए क्या नारी के बिना इस संसार की कल्पना करना मात्र पाप है जमीन और जननी के बिना न आसमान का वजूद है न इंसान का हर चीज बे वजूद है जननी और जमीन का इसका हाथ जिसके सिर पर रख जाता है हृदय से उसे किसी मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे में सिर झुकाने की औपचारिकता की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती माता पिता अगर घर में खुश हैं तो आपके घर चारों धाम का बास है और जिस घर में यह रोते हैं या दुखी होते हैं बो घर पैसा बेसक कमा ले मगर सुकून और सफलता फूलता फूलता कभी नहीं है आज हमने दौलत को सब-कुछ मान लिया है परिणाम हमारे समाज में व्रद्धाआश्रम मासूम अनाथालय का विकसित होना आदमी के हर सिस्टम और हर रिश्ते व्यक्ति विशेष के लिए अपमान जनक है जिसका कोई नहीं होता है उसके लिए एसे स्थान घर बन जाते और जो भरे पूरे संपन्न होते हुए इनमें जीवन की पनाह लेकर जीते हैं बो घर घर नहीं रहता है अपराधी सोच का हथियार बन जाता है नारी के बिना किसी भी व्यक्ति और पुरुष का कोई वजूद नहीं इसके ही अधिकार पर तमाशा खड़ा करने बाले अपनी अपनी प्रोग्रेस में झांकें मै भाजपा का निष्पक्ष इस मुद्दे को लेकर समर्थन करती हूं कि नारी के अधिकार और सुरक्षा के लिए तत्पर है जो किसी सरकार के द्वारा नहीं सोचा गया इसी सोच को उठाकर अगर बाकी पार्टियां अपने हालातों का अनुभव करें तो बहुत कुछ साफ-साफ उन्हें महसूस होगा कि विपक्ष का नारी सम्मान और अधिकारों को लेकर किसी तरह का विरोध प्रदर्शन करना भविष्य के लिए भी बहुत महंगा कृत्य हो सकता है जिसने दुआओं का मुख्य मार्ग ढूंढ लिया उसे परास्त करना इतना आसान नहीं होगा अपनी अपनी करनी और कथनी का अंतर देखें परिणाम खुद समझ में आ जाएगा कि चूक कहां और कैसे हो रही है–

जहां-तहजीबो का चीरहरण होता हो वहां न ईश्वर रहता है न नारी भाषा शैली में नंगनता कृत्यों में अपराध सोच में मोच और तेरे मेरे के स्वार्थ में जकड़ा हुआ हो– वहां कुछ भी हासिल नहीं होता है–

हंगामा है किस बात का–

चीज अपनी ही पर–

नारी के अधिकारों पर ये राजनीति कैसी कोई तोहफे तो नहीं बांटे जा रहे हैं उसी के अधिकार उसे तिल तिल देकर उसे एहसान की तरह अनुभव कराने को क्यों मजबूर किया जा रहा है नहीं तो खुद ही बताएं बो लोग जो विरोध मे है फिर इतना भी बता देना चाहिए कि बो कितने हक का अधिकार रखती हैं पढ़ी लिखी नारी के लिए यह बेमतलब का हंगामा बहुत मेहगा पड़ सकता है जब बात जुवां से निकल कर नारी के कानों तक पहुंच चुकी है तो विरोधियों को अपना परिणाम बिना लड़े ही देख लेना चाहिए और भविष्य में कुछ मुद्दों को बहुत सोच समझ कर उठाना चाहिए राजनीति कोई खेल नहीं है एक योगी मोदी का विरोध करना मतलब इस बिल का पास ना होना भी उन्हीं के पक्ष में जाएगा लेकिन पूरी नारी शक्ति के विरोधी बो विरोध करने वाले जरूर हो सकते है तोल मोल कर बोलने और सभ्यता सादगी एक नेता की पहचान है पर ताकतों और पावर का स्तेमाल करती है आज का पढ़ा लिखा व्यक्ति सामने अपना बचाव पीछे अपने अधिकारों की सुरक्षा करता है और हर व्यक्ति बिकाऊ भी नहीं होता है ये पब्लिक है सब जानती है और सबसे बड़ी बात कि सब भोगी है उससे भी बड़ी बात यहां पर आकर टिकती है कि रोटी कपड़ा और मकान इंसान की मुख्य जीवन की चीजें नहीं होती है जो आज का इंसान इन्हें जुटाने में जीवन व्यर्थ कर देता है घर समाज देश परदेश में भी हमारी पहचान होनी जरूरी है बिना पहचान के इंसान समाज में नहीं चल सकता है तो देश परदेश में कौन जानेगा अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा देखने परखने की सोच बहुत आवश्यक होती है हमारी निष्पक्षता भी हमें कभी कभी पक्षपात का गुलाम बना देती है जैसे कि हकीकत लिखने के लिए हकीकत तक पहुंचना भी तो जरूरी है आज पढ़कर लोग हमें पक्षपात से जरूर नवाजेंगे स्वार्थ की दृष्टि से जरूर देखेंगे पर उन्हें बताना होगा आज तक हमने सरकार की हजारों योजनाओं में से एक का भी कोई फायदा नहीं लिया इसका मतलब यह तो नहीं कि हम सत्य और असत्य का फर्क महसूस करना छोड़ देंगे।

*लेखिका,पत्रकार,दीप्ति,चौहान।✍️*

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