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जलकल विभाग की आउटसोर्सिंग कंपनी ‘वाबाग’ पर शोषण का आरोप, कर्मचारियों ने सौंपा 5 सूत्रीय मांग पत्र, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*जलकल विभाग की आउटसोर्सिंग कंपनी ‘वाबाग’ पर शोषण का आरोप, कर्मचारियों ने सौंपा 5 सूत्रीय मांग पत्र*

*समय पर वेतन न मिलने और ओवरटाइम का भुगतान न होने से आक्रोशित कर्मचारियों ने न्याय की गुहार लगाई*

 

​आगरा। आगरा के जलकल विभाग में सीवर व्यवस्था को संभालने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी “वाबाग” के कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। कंपनी द्वारा किए जा रहे कथित शोषण और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर आज कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की और सक्षम अधिकारी को एक 5 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर न्याय की मांग की है।

​कर्मचारियों का आरोप है कि शहर की सीवर व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए वे दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन कंपनी उन्हें सुविधाएं देने के बजाय उनका आर्थिक और मानसिक शोषण कर रही है। समय पर वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने भुखमरी और बच्चों की पढ़ाई छूटने का संकट खड़ा हो गया है। ​कर्मचारियों की 5 प्रमुख मांगें:​न्यूनतम वेतन ₹18,000 हो: बढ़ती महंगाई को देखते हुए सभी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाए और इसे न्यूनतम ₹18,000 प्रति माह किया जाए। निर्धारित ड्यूटी समय के बाद कर्मचारियों से कराए जाने वाले अतिरिक्त कार्य के लिए ₹100 प्रति घंटा की दर से ओवरटाइम का भुगतान अनिवार्य किया जाए।

​महीने की अंतिम तारीख तक आए सैलरी: वेतन मिलने में होने वाली देरी को समाप्त करते हुए हर महीने की अंतिम तारीख तक अनिवार्य रूप से बैंक खातों में सैलरी भेजी जाए।

​पीएफ, ईएसआई और दुर्घटना बीमा का लाभ: सभी कर्मचारियों का भविष्य निधि संगठन (EPF) और ईएसआई (ESI) में पंजीकरण सुनिश्चित हो, साथ ही जोखिम भरे कार्य को देखते हुए दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाए।ऑन-ड्यूटी किसी भी प्रकार की असुविधा या विवाद से बचने के लिए कंपनी द्वारा प्रत्येक कर्मचारी को आधिकारिक आईडी कार्ड प्रदान किया जाए।”हम शहर को साफ रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, लेकिन हमें समय पर सैलरी तक नहीं मिलती। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। हमें माननीय महोदय पर पूरा भरोसा है कि वे इस मामले में सकारात्मक हस्तक्षेप करेंगे और हमें हमारा हक दिलवाएंगे।”

​कर्मचारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे की रणनीति तय करने के लिए मजबूर होंगे।

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