योगासन भारत की मान्यता पर संकट: खेल मंत्रालय के नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
आगरा।दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ‘योगासन भारत’ की मान्यता रद्द करने का फैसला खेल मंत्रालय और संबद्ध संस्थाओं के बीच की अनियमिताओं को उजागर करता है। नियमों के अनुसार, किसी भी फेडरेशन को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु पिछले 3 वर्षों की संपूर्ण गतिविधियों, ऑडिटेड बैलेंस शीट, और 3 सीनियर व 3 सब-जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का लेखा-जोखा देना अनिवार्य है।
आगरा स्थित ‘ऑल इंडिया योग स्पोर्ट्स एसोसिएशन’ के महासचिव, डॉ. वी.पी. सिंह ने मामले पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक विस्तृत शिकायत की हैं।
खेल मंत्रालय की कृपा दृष्टि या नियमों की बलि
जब से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है, तब से भारत में योग के प्रति जागरूकता और सक्रिय इकाइयों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि योग को औपचारिक खेलों में शामिल करने की बहुप्रतीक्षित मांग आज भी अधूरी है और योग्य योग संगठन उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण खेल मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत और मनमानी है, जो हाल ही में ‘योगासन भारत’ की मान्यता रद्द होने के फैसले से साबित होता है।
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ‘योगासन भारत’ की राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्यता रद्द किया जाना, नियमों की घोर अवहेलना का परिणाम है। खेल मंत्रालय के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर पहले ‘NYSF’ को नियम विरुद्ध मान्यता दी और फिर बाद में ‘योगासन भारत’ को राष्ट्रीय खेल फेडरेशन बना दिया।
खेल नियमों के अनुसार, किसी भी महासंघ को खेल मंत्रालय से मान्यता हेतु पिछले 3 साल की संपूर्ण गतिविधियों, लेखा-जोखा, और ऑडिटेड बैलेंस शीट प्रस्तुत करनी होती है। साथ ही तीन सीनियर और तीन सब-जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का रिकॉर्ड देना अनिवार्य है। ‘ऑल इंडिया योग स्पोर्ट्स एसोसिएशन’ के महासचिव डॉ. वी.पी. सिंह के अनुसार, NYSF को मंत्रालय ने बिना किसी जांच-पड़ताल के आँखें मूंदकर मान्यता दे दी।
हैरानी की बात यह है कि मान्यता प्राप्त करने वाली संस्थाएं भी इन नियमों से भली-भांति वाकिफ थीं। नियमों को दरकिनार कर मान्यता लेने वाले और देने वाले (मंत्रालय के अधिकारी)—दोनों ही इस प्रक्रिया में समान रूप से दोषी हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि खेल मंत्रालय किस तरह बिना उचित जांच-पड़ताल के फैसले ले रहा था।
यदि योग को वास्तव में खेलों की श्रेणी में उचित सम्मान दिलाना है, तो योग्य संगठनों को आगे आना होगा। साथ ही, NYSF, योगासन भारत और मान्यता देने वाले खेल मंत्रालय के दोषी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। खेल मंत्रालय को पारदर्शी तरीके से नए सिरे से मान्यता प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि वास्तविक योग खिलाड़ियों और संगठनों का भविष्य सुरक्षित रह सके।









