23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपी गई टीईटी की अनिवार्यता प्राकृतिक न्याय के विपरीत , नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। सनत कुमार सिंहBMF News

23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपी गई टीईटी की अनिवार्यता प्राकृतिक न्याय के विपरीत , नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। सनत कुमार सिंह

 

 

वाराणसी।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ वाराणसी के वरिष्ठ शिक्षक नेता सनत कुमार सिंह ने कहा कि हम देश के लाखों शिक्षकों की ओर से माननीय सांसदों एवं भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के पैरा-4 को संसद द्वारा कानून का हिस्सा बनाया जाए।शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की भावना से स्पष्ट है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया था। परन्तु न जाने क्यूं आरटीई संशोधन अधिनियम 2017 में स्पष्ट मत व्यक्त न किए जाने से वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर सेवा के बीच में नई योग्यता (टेट) लागू करना न्याय प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। लाखों शिक्षकों की रहनुमाई कर रहे टी0एफ0आई0 के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा की अगुवाई में मा0 प्रधानमंत्री जी सहित मा0 शिक्षा मंत्री व पूरे देश में मा0 सांसदों को ज्ञापन देकर शिक्षक प्रतिनिधियों ने अवगत कराया है कि आज देश के लगभग 25 लाख शिक्षक एवं उनके परिवार इस विषय को लेकर चिंतित हैं। हम शिक्षकों की मांग किसी विशेष लाभ की नहीं बल्कि पूर्व से लागू विधिक व्यवस्था को संसद द्वारा स्पष्ट रूप से अधिनियम में शामिल कर शिक्षकों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की है। सनत कुमार सिंह ने कहा कि हम सभी जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस विषय को संसद में उठाकर शिक्षकों के हित में आवश्यक विधायी कार्यवाही कराएं तथा मा0 प्रधानमंत्री जी से विनम्र आग्रह है कि “एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के पैरा-4 को संसद द्वारा कानून का हिस्सा” बनाया जाए।

 

 

Leave a Comment