अम्बरगंज वार्ड में नजूल भूमि पर कब्जा: सपा पार्षद सबा एहसान के पिता का दो मंजिला ‘पार्टी ऑफिस-कम-मकान’, जांच एजेंसियां ‘डर’ के साए में चुप, BMFNEWS

*अम्बरगंज वार्ड में नजूल भूमि पर कब्जा: सपा पार्षद सबा एहसान के पिता का दो मंजिला ‘पार्टी ऑफिस-कम-मकान’, जांच एजेंसियां ‘डर’ के साए में चुप*

 

लखनऊ — ठाकुर गंज के अम्बरगंज वार्ड (वार्ड नंबर 101) में नजूल भूमि (सरकारी जमीन) पर कथित कब्जे का एक और मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी की महिला पार्षद सबा एहसान मंसूरी (सबा अहसान मंसूरी) के पिता मोहम्मद एहसान द्वारा कथित तौर जमीन के अवैध कारोबार करते और क्षेत्र में दबंग भू-माफिया की छवि रखते हैं इनके द्वारा लम्बे समय से नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कर दो मंजिला निर्माण कराया गया है, जिसमें निचली मंजिल पर समाजवादी पार्टी का कार्यालय और ऊपरी मंजिल पर निजी मकान बनाया गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब इस अवैध कब्जे का विरोध किया जाता है तो पुलिस की मिलीभगत से मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं और धमकियां दी जाती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), लखनऊ नगर निगम और नजूल विभाग आज तक इसकी कोई जांच नहीं कर सके — या शायद ‘डर’ के मारे नहीं कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

स्थानीय निवासियों के अनुसार, अम्बरगंज क्षेत्र की नजूल भूमि पर बिना किसी अनुमति के दो मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। नीचे पार्टी का कार्यालय चल रहा है, जो राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जबकि ऊपर पार्षद परिवार का निजी उपयोग हो रहा है।

विरोध करने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि “जब हमने इस अवैध निर्माण पर आवाज उठाई तो पुलिस की मिलीभगत से हमें ही मुकदमों में फंसाया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं।”

यह मामला केवल एक निर्माण का नहीं, बल्कि भू-माफिया, राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक मिलीभगत का प्रतीक बन गया है।

विभाग क्यों चुप?

LDA: नजूल भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी LDA की है, लेकिन आज तक कोई नोटिस, सर्वे या कार्रवाई नहीं हुई।

नगर निगम: वार्ड पार्षद की ही शिकायत पर कार्रवाई की उम्मीद करना व्यर्थ है, लेकिन जोन-6 अधिकारियों ने भी आंखें मूंद ली हैं।

नजूल विभाग: सरकारी जमीन की देखरेख करने वाला विभाग भी ‘मौन’ साधे हुए है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि “भू-माफिया एसन (एहसान)” के नाम से जाना जाने वाला यह कब्जा इतना मजबूत है कि विभागीय अधिकारी डर के मारे दखल नहीं दे रहे। लखनऊ में नजूल भूमि पर ऐसे सैकड़ों कब्जे हैं, लेकिन राजनीतिक संरक्षण मिलने पर उन्हें छुआ तक नहीं जाता। खैर

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