*महा-खुलासा: रायपुर पुलिस के ‘क्राइम सिंडिकेट’ का पर्दाफाश; वर्दी की आड़ में रची जा रही है निर्दोष युवाओं के विनाश की साजिश!*
*तेलीबांधा थाने की FIR No. 0021/2026: क्या पुलिसकर्मी बन गए हैं न्याय के हत्यारे?*
*’भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ ने सबूतों के साथ खोली पोल, संस्थापक ए.के. बिंदुसार की चेतावनी: “अब नहीं चलेगा वर्दी का यह नंगा नाच!”*
नई दिल्ली/रायपुर:
क्या छत्तीसगढ़ पुलिस का एक वर्ग अब ‘खाकी’ की मर्यादा को कलंकित कर अपराधी बन बैठा है? क्या राजधानी रायपुर की सड़कों पर पुलिस के ‘गुड वर्क’ के नाम पर निर्दोषों की जिंदगी तबाह करने का एक सुनियोजित ‘फर्जीवाड़ा सिंडिकेट’ सक्रिय है? भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) द्वारा हाल ही में किए गए खुलासे ने छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय अपनी मांग रख कर नींव हिला दी है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में दर्ज FIR No. 0021/2026 को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे न केवल डरावने हैं, बल्कि कानून व्यवस्था के प्रति जनता के भरोसे को तार-तार करने वाले हैं।
*वर्दी की आड़ में रची जा रही है ‘साजिश की पटकथा’*
मामला 18 जनवरी 2026 की शाम का है, जब 20 वर्षीय युवा राहुल ध्रुव बरवे को कथित रूप से अवैध मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लेकिन भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) की गहन पड़ताल और तथ्यों के विश्लेषण ने पुलिस के इस दावे को झूठा साबित कर दिया है।
संगठन का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस ने अपनी पदवी का दुरुपयोग करते हुए न केवल साक्ष्य गढ़े, बल्कि एनडीपीएस एक्ट के अनिवार्य कानूनी प्रावधानों की भी सरेआम धज्जियां उड़ाईं। उपनिरीक्षक एच.आर. यदु, प्र.आर. अमित सिन्हा, आरक्षक केशव यदु और सैनिक प्रशांत कौरव की इस टीम ने जिस तरह से ‘फिक्स्ड गवाहों’ को खड़ा किया, वह पुलिसिंग के नाम पर एक काला धब्बा है।
*”वर्दी का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं, अब हर दोषी को हिसाब देना होगा”: ए.के. बिंदुसार*
इस पूरे प्रकरण पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) के संस्थापक एवं इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के मुख्य संयोजक, ए.के. बिंदुसार ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ प्रशासन को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने कहा:
“एक युवा की गिरफ्तारी केवल पुलिस के रिकॉर्ड में एक संख्या की वृद्धि नहीं है, बल्कि यह एक परिवार के सपनों का कत्ल है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और अपनी वर्दी की चमक बढ़ाने के लिए निर्दोषों के जीवन से खेलने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था बीमार हो चुकी है। हम इसे केवल एक केस नहीं मान रहे, बल्कि यह एक व्यवस्थित अपराध का सिंडिकेट है जिसे हम जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। हमारी मांगें स्पष्ट हैं—पुलिस के इस ‘फर्जीवाड़ा सिंडिकेट’ के हर चेहरे को बेनकाब किया जाए, अन्यथा भारतीय मीडिया फाउंडेशन का राष्ट्रव्यापी जनांदोलन छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दिखेगा।”
श्री बिंदुसार ने आगे कहा, “पुलिस का काम न्याय करना है, अपराध रचना नहीं। मैं छत्तीसगढ़ शासन से अपनी मांग रखते हुए कहा कि यदि इस मामले में उच्चस्तरीय SIT जांच नहीं हुई, तो हम इस लड़ाई को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक ले जाएंगे और दोषी अधिकारियों को उनके निजी वेतन से पीड़ित परिवार को हर्जाना भरने पर मजबूर कर देंगे।”
*डिजिटल साक्ष्यों का ऑडिट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन*
सुप्रीम कोर्ट के ‘परमवीर सिंह सैनी’ मामले के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, तेलीबांधा पुलिस ने तलाशी और गिरफ्तारी के दौरान कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की। ए.के. बिंदुसार के नेतृत्व में संगठन ने मांग की है कि:
घटनास्थल और थाने के बीच के मार्ग के सभी सरकारी व निजी सीसीटीवी फुटेज तत्काल जब्त किए जाएं।
उपनिरीक्षक एच.आर. यदु और उनकी टीम के मोबाइल ‘लोकेशन ऑडिट’ व टावर डंप की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘फिक्स्ड गवाहों’ के पिछले 5 वर्षों के रिकॉर्ड की गहन जांच हो।
*निर्णायक लड़ाई की ओर ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’*
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, गृह सचिव, डीजीपी और छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग रखेगा।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी की टीम इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है। संस्थापक ए.के. बिंदुसार के नेतृत्व में, हम हर दिन इस फर्जीवाड़े से जुड़े नए सबूतों का खुलासा करेंगे। छत्तीसगढ़ की जनता अब जाग चुकी है और वह अब पुलिस के इन ‘फर्जी कारनामों’ को चुपचाप नहीं सहेगी।








