आस्था और प्रकृति का संगम: रकसगंडा में श्रृंगी ऋषि की चरण धूलि से पावन हुई सूरजपुर की धरा

*आस्था और प्रकृति का संगम: रकसगंडा में श्रृंगी ऋषि की चरण धूलि से पावन हुई सूरजपुर की धरा*

 

सूरजपुर।

छत्तीसगढ़ का उत्तरी आंचल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन तपोभूमियों के लिए सदैव से आकर्षण का केंद्र रहा है। इसी कड़ी में, सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड में रेहण्ड नदी पर स्थित रकसगंडा जलप्रपात न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह महान श्रृंगी ऋषि के आगमन और उनकी आध्यात्मिक साधना का जीवंत साक्ष्य भी है।

हाल ही में, इस पावन क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करने के लिए एक विशिष्ट दल ने इस स्थल का भ्रमण किया।

इस दल में भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एवं इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के मुख्य संयोजक, वरिष्ठ पत्रकार ‘मीडिया सरकार’ ए.के. बिंदुसार के नेतृत्व में कई वरिष्ठ प्रबुद्ध जन सम्मिलित हुए।

इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भ्रमण के दौरान ‘मीडिया सरकार’ ए.के. बिंदुसार के साथ सांस्कृतिक फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्री 1008 बाबा मुकेश महाराज, यूनियन के राष्ट्रीय डिप्टी चेयरमैन एवं शकुन टाइम्स के सह-संपादक मिथिलेश कुमार मौर्य, वरिष्ठ समाजसेवी श्री गोपाल दीक्षित एवं पंडित गौरव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

 

श्रृंगी ऋषि का प्रवास और पौराणिक कथा

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, अपनी लंबी आध्यात्मिक यात्राओं के दौरान जब श्रृंगी ऋषि इस क्षेत्र से गुजरे, तो रकसगंडा की शांत वादियों और जलप्रपात की दिव्य ध्वनि ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया। यहाँ के कुंडों और चट्टानों के बीच ऋषि ने ईश्वर की आराधना की थी, जिससे यह संपूर्ण धरा ऊर्जावान हो उठी।

राक्षस संहार का प्रसंग: ‘रकसगंडा’ नाम की उत्पत्ति के पीछे भी एक गहरी पौराणिक कथा है। स्थानीय बुजुर्गों और मान्यताओं के अनुसार, ‘रकस’ का अर्थ राक्षस और ‘गंडा’ का अर्थ विनाश से है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में ऋषियों की तपस्या में बाधा डालने वाली आसुरी शक्तियों का अंत ऋषियों के तपोबल से इसी स्थान पर हुआ था।

तपोभूमियों का संगम है सूरजपुर,

भ्रमण के दौरान चर्चा करते हुए ए.के. बिंदुसार ने कहा कि सूरजपुर की धरती केवल श्रृंगी ऋषि ही नहीं, बल्कि कई महान विभूतियों की साक्षी रही है:

बिलद्वार गुफा: ऋषि महरम मंडा की प्राचीन साधना स्थली।

सीतालेखनी: ऋषि सुतीक्ष्ण का आश्रम, जहाँ माता सीता के वनवास काल की स्मृतियाँ सुरक्षित हैं।

विश्रामपुर: ऋषि विश्रवा (रावण के पिता) की तपोभूमि के रूप में विख्यात।

 

भ्रमण दल ने सामूहिक संदेश देते हुए कहा कि रकसगंडा जैसे पवित्र और प्राकृतिक स्थलों का संवर्धन करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इन स्थलों के पीछे छिपी पौराणिक कहानियों का दस्तावेजीकरण करना आवश्यक है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी गौरवशाली जड़ों और संस्कृति से जुड़ी रह सकें। संकरी चट्टानों के बीच गिरता दूधिया पानी और यहाँ की गुफाएँ आज भी उस त्रेतायुगीन तपस्या का जीवंत अहसास कराती हैं।

Leave a Comment