विकास की असली परिभाषा ईंट और पत्थरों में नहीं, बल्कि इंसानियत की सेवा में छिपी होती है

*सेवा और समर्पण से महकती ओबरा की पावन धरा*

 

*विकास की असली परिभाषा ईंट और पत्थरों में नहीं, बल्कि इंसानियत की सेवा में छिपी होती है।*

 

*ओबरा की नई पहचान मशीनों के शोर के बीच गूँजता सेवा और स्वच्छता का मंत्र*

रिपोर्ट सत्यदेव पांडे बीएमएफ ब्यूरो चीफ सोनभद्र

 

ओबरा (सोनभद्र) | 19 अप्रैल, 2026 सोनभद्र की औद्योगिक नगरी ओबरा की पहचान अब बदलने लगी है। यहाँ की धरती पर हाल के दिनों में आया वैचारिक और सामाजिक परिवर्तन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सच्चा विकास केवल कंक्रीट की ऊंची इमारतों और लोहे के विशाल ढांचों से पूरा नहीं होता। वास्तविक प्रगति और खुशहाली तब आती है, जब समाज का हर व्यक्ति एक-दूसरे के दुख-सुख में सहभागी बनता है। ओबरा की धरती पर खिलता यह सेवा का पुष्प न केवल अपनी सुगंध से इस क्षेत्र को महका रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणापुंज भी बन रहा है। श्री राम सेवा समिति और स्थानीय नागरिकों का यह सामूहिक प्रयास स्पष्ट संदेश देता है कि निस्वार्थ भाव ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। एकजुटता और समर्पण के बल पर ही बड़े से बड़े संकल्पों को सिद्ध किया जा सकता है। इस पूरे अभियान में एक चेहरा विशेष रूप से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पत्रकार अजीत सिंह। पत्रकारिता के माध्यम से जनता की आवाज उठाने वाले अजीत सिंह ने ओबरा नगरी में सेवा ही समर्पण के भाव को धरातल पर उतारा है। वह केवल इस आयोजन के मार्गदर्शक ही नहीं हैं, बल्कि स्वयं जमीन पर उतरकर कार्य करते हैं वे स्वयं अपने हाथों से खिचड़ी का प्रसाद तैयार करने में सहयोग करते हैं।कतारों में लगे भक्तों और जरूरतमंदों को पूरी आत्मीयता के साथ प्रसाद बांटते हैं। सबसे प्रेरक दृश्य प्रसाद वितरण के बाद देखने को मिलता है। जब कार्यक्रम समाप्त होता है, तो अजीत सिंह स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की सफाई करते हैं, जिससे स्वच्छता अभियान को भी नई गति मिल रही है। आने वाले समय में जब इतिहास ओबरा के विकास को याद करेगा, तो उसमें केवल बिजली उत्पादन के आंकड़े नहीं होंगे। इतिहास उन हाथों का भी जिक्र करेगा जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा में उठे थे। यह सेवा भाव भविष्य में इस औद्योगिक शहर को एक नई और गौरवशाली ऊंचाई पर ले जाएगा।ओबरा की इस नई पहचान को और सशक्त बनाने की जिम्मेदारी अब हम सबकी है। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि विकास के इस सफर में सेवा और समर्पण के इस पुष्प को कभी कुम्हलाने नहीं देंगे।अजीत सिंह और श्री राम सेवा समिति का यह प्रयास एक गौरवशाली कदम है, जो हमें एक बेहतर और मानवीय ओबरा की ओर ले जा रहा है।आइए, हम सब मिलकर ओबरा की इस नई पहचान को और सशक्त बनाएं। संकल्प लें कि विकास के इस सफर में सेवा और समर्पण के इस पुष्प को कभी कुम्हलाने नहीं देंगे।

 

– एक गौरवशाली कदम, एक बेहतर ओबरा की ओर।

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