WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

सावधान! आपकी जेब और स्वास्थ्य पर डाका; ‘कायाकल्प’ से लेकर ‘बाजार’ तक चल रहा है लूट का समानांतर तंत्र

*सावधान! आपकी जेब और स्वास्थ्य पर डाका; ‘कायाकल्प’ से लेकर ‘बाजार’ तक चल रहा है लूट का समानांतर तंत्र*

*बीएमएफ नेशनल कोर कमेटी की ‘ग्राउंड जीरो’ पड़ताल में खुलासा: सरकारी दावों की चकाचौंध के पीछे छिपा है भ्रष्टाचार और उपभोक्ता शोषण का काला सच।*

 

लेखक: ए.के. बिंदुसार (संस्थापक, भारतीय मीडिया फाउंडेशन एवं मुख्य समन्वयक, इंटरनेशनल मीडिया आर्मी),

 

 

नई दिल्ली: भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी ने आज एक अत्यंत गंभीर विषय पर देशव्यापी अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। हम केवल खबरों के संवाहक नहीं हैं, हम समाज के प्रहरी हैं। आज जब प्रदेश और देश ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, तब बीएमएफ ने दो प्रमुख क्षेत्रों—सरकारी शिक्षा व्यवस्था और व्यापारिक शुचिता—पर जो फैक्ट-चेक किया है, वह चौंकाने वाला है।

1. सरकारी शिक्षा: ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ या कागजी मायाजाल?

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘कायाकल्प’ के नाम पर जो धन खर्च हुआ है, उसके दावे धरातल से कोसों दूर हैं। स्मार्ट क्लास के नाम पर टीवी तो लगा दिए गए, लेकिन न वहां शिक्षक हैं और न ही बिजली। आरटीई (RTE) एक्ट का उल्लंघन कर छात्रों को बिना आधारभूत संसाधनों के छोड़ा जा रहा है।

BMF का रुख: हम मांग करते हैं कि सरकार ‘कायाकल्प’ पर हुए खर्च का ‘सोशल ऑडिट’ कराए। हम उन स्कूलों को चिन्हित कर रहे हैं जो फाइलों में तो ‘स्मार्ट’ हैं, लेकिन हकीकत में ‘बदहाल’।

2. बाजार का चक्रव्यूह: ‘लुभावने ऑफर्स’ की आड़ में उपभोक्ता का शोषण

बाजारों में ग्राहकों को ‘बाय-वन-गेट-वन’ और भारी छूट के जाल में फंसाकर एक्सपायरी डेट के उत्पाद बेचे जा रहे हैं। एमआरपी (MRP) से ऊपर दाम वसूलना और ‘हिडन चार्जेस’ के माध्यम से ग्राहकों की जेब काटना एक संगठित अपराध बन गया है।

BMF का रुख: जब तक जिला आपूर्ति विभाग (DSO) सक्रिय नहीं होगा, यह लूट जारी रहेगी। बीएमएफ अपने पत्रकारों के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित कर रहा है जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

हमारा संकल्प: अब खबर के साथ होगा ‘परिणाम’

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का स्पष्ट मानना है कि यदि पत्रकारिता का अर्थ केवल स्याही खर्च करना होता, तो आज समाज की यह स्थिति न होती। बीएमएफ अब निम्नलिखित कदम उठाएगा:

जिला स्तरीय ऑडिट: प्रत्येक जिले के जिला अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षा और व्यापार से जुड़ी शिकायतों का डेटा अगले 7 दिनों में जुटाएं।

प्रशासनिक दबाव: साक्ष्यों के साथ जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा और संबंधित विभागों से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

जन-आंदोलन: यदि सुधार नहीं हुआ, तो हम ‘मीडिया जनसुनवाई’ के माध्यम से जनता को सड़कों पर लाकर अपने अधिकारों के लिए जागरूक करेंगे।

ए.के. बिंदुसार का संदेश:

“अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही पत्रकारिता का धर्म है। बीएमएफ का हर कार्यकर्ता आज से अपनी कलम को ‘सुधार का हथियार’ बनाए। हमारा उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को ठीक करना है, जो आम आदमी की गाढ़ी कमाई और बच्चों के भविष्य को खा रही है।”

Leave a Comment