संत निरंकारी मिशन के जोन स्तरीय महिला समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, रिपोर्ट अमित दयाल

*संत निरंकारी मिशन के जोन स्तरीय महिला समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब*

*मर्यादा जो तोड़े मानव, दु:ख देता- दु:ख पता है:- निरंकारी संत*

*सहनशीलता, मर्यादित जीवन को देती है जन्म – निरंकारी संत*

एटा – सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद से निरंकारी महिला संत समागम का आयोजन आगरा के वेस्ट अर्जुन नगर स्थित निरंकारी सत्संग भवन पर हुआ। यहां पर निरंकारी मिशन की ब्रांच एटा से भी सेकड़ों महिलाये आगरा पहुंची।महिला समागम के दौरान गुरु ग्राम से पधारी निरंकारी संत बहन निर्मल मनचंदा जी ने सैकड़ो महिलाओ को संबोधित करते हुए कहा- मानव जीवन मर्यादाओं से बंधा हुआ है। जीवन के हर क्षेत्र में मर्यादित होकर चलना जीवन को सुंदर और सहज बनाता है। यदि कोई अमर्यादित जीवन जीने का प्रयास करता है तो वह स्वयं भी दु:ख पता है और दूसरों को भी दु:ख पहुँचता है। जिस परिवार के सदस्य मर्यादा में रहकर अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन करते हैं वहां प्रेम दया करुणा एकता बनी रहती है। ब्रह्म ज्ञान पारिवारिक जीवन में शारीरिक,मानसिक और आर्थिक रूप से समृद्धि प्रदान करता है।

निरंकारी प्रचारिका संत ने बताया कि सहनशीलता मर्यादा को जन्म देती है नारी विविध भूमिका निभाते हुए बेटी,बहन, पत्नी और माँ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निर्वाह करती है। बच्चों के प्रारंभिक जीवन को संवारने का कार्य भी एक महिला माँ के रूप में करती है। नारी पृथ्वी पर एक ऐसी शक्ति है जिसने गुरु पीर पैगम्बरों को भी जन्म दिया है। आओ हम सब नारी का सम्मान करें।

निरंकारी संत ने कहा चिंता नहीं चिंतन करो जिन चिंताओं में पड़ कर मानव आपस में लड़ता झगड़ता है और आपस में मतभेद पैदा करता है। परमात्मा के चिंतन से (ब्रह्म ज्ञान ) वह सब उलझने सुलझ जाती है। परमात्मा के ज्ञान से मानव में समर्पण भावना प्रगट होती। जहाँ समर्पण होता है वहाँ प्रेम स्वतः ही प्रकट हो जाता है। जिस प्रकार एक बीज मिट्टी को समर्पण करता है तो उसे फूल,फल छाया सब मिल जाती है। उसी प्रकार जब मानव परमात्मा को समर्पण करता है।तो उसे प्यार,नम्रता, सहन- शीलता जैसे-दिव्य गुण प्राप्त होते है।जिससे मानव जीवन सहज़ और सरल बन जाता है।

निरंकारी महिला समागम में उपस्थित सैकड़ो महिलाओ को भक्ति भावना से जोडते हुये, निरंकारी प्रचारिका ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हर परिवार, हर घर आध्यात्म जुड़े जिससे घर परिवार का वातावरण सुन्दर और सुखद बने। जीवन में बदलाव के लिए सहनशीलता जरूरी है। सहनशीलता मर्यादित जीवन को जन्म देती है।

निरंकारी प्रतिनिधि ने बताया कि समागम में अनेक वक्ताओ ने हिंदी, अंग्रेजी व नाटकीय ढंग से नारी सशक्तिकरण पर अपने विचार प्रस्तुत किये। निरंकारी महिला समागम में आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, टूंडला, मैनपुरी, उरई, एटा आदि आने वाले अनेक स्थानों से पहुंचेने बाले निरंकारी श्रद्धांलुओं का जोनल इंचार्ज एच के अरोड़ा ने आभार व्यक्त किया।

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