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बांदा में सूखे की आहट से डरे किसान,क्या फिर लौटेंगे सूखे के वो काले दिन,मानसून की बेरुखी से बुंदेलखंड चिंतित, रिपोर्ट निशा कांत शर्मा एडवोकेट

*बांदा में सूखे की आहट से डरे किसान,क्या फिर लौटेंगे सूखे के वो काले दिन,मानसून की बेरुखी से बुंदेलखंड चिंतित*

 

 

 

बांदा।बुंदेलखंड के लोग खासकर किसान मानसून की बेरुखी से परेशान हैं।खेती पर कम बारिश का प्रभाव पड़ रहा है,सिंचाई की व्यवस्था के लिए खेत तालाब योजना की शुरुआत की गई थी,लेकिन सरकारी उदासीनता से ये परियोजना भी दम तोड़ती हुई दिखाई दे रही है।तालाब और खेतों में पानी की जगह दरारें पड़ गई हैं।मौसम के तेवर को देखकर किसान सोचने को मजबूर हो गए हैं कि,क्या फिर लौटेंगे सूखे के वो काले दिन।

 

 

*बुंदेलखंड में कम बारिश से हाल बेहाल*

 

समय बदला,लेकिन बुंदेलखंड के लोगों का सूखा से नाता नहीं खत्म हुआ।कई बार सरकार ने सूखे को खत्म करने के लिए प्लान बनाए,लेकिन लापरवाही और देखरेख के अभाव में हर प्लान फेल हो जा रहा है।हर बार की तरह इस बार भी दूसरे इलाकों की तुलना में यहां कम बारिश का सिलसिला बदस्तूर जारी है।बारिश न होने से लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

 

*सिंचाई के लिए पानी का अभाव*

 

खेती के लिए पानी की परेशानी को दूर करने के लिए सरकार ने खेत तालाब योजना की शुरुआत की।किसानों के खेत में भी तालाब खुदाई का काम शुरू हुआ।लगभग एक दशक पहले शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक हजारों तलाब खुदवाए जा चुके हैं,लेकिन ये तालाब भी किसानों की सिंचाई के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं।बारिश के समय ही यह तालाब भर पाते हैं और फसलों की एक ही सिंचाई में इन खेत तालाबों का पानी खत्म हो जाता है और फिर साल भर यह तालाब सूखे पड़े रहते हैं।बारिश के समय ही यह तालाब भर पाते हैं और फसलों की एक ही सिंचाई में इन खेत तालाबों का पानी खत्म हो जाता है और फिर साल भर यह तालाब सूखे पड़े रहते हैं।

 

*किसान पलायन को मजबूर*

 

सिंचाई की दूसरी व्यवस्था न होने से खेतों में अन्न की पैदावार कम होती है।पर्याप्त पानी न मिलने से पैदावार कमजोर हो जाती है।लागत को छोड़िए साल भर का अन्न भी किसान नहीं पैदा कर पाते हैं,इसका सीधा असर उनके भरण पोषण पर पड़ता है।पेट भरने और परिवार चलाने के लिए किसानों को बाहर का रुख करना पड़ता है।

 

*केन बेतवा लिंक परियोजना का हाल*

 

किसानों की परेशानी को दूर करने के लिए केन बेतवा लिंक परियोजना की आधारशिला रखी गई,लेकिन निर्माणाधीन होने से फिलहाल किसानों को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। बुंदेलखंड में जो छोटी नदियां,तालाब और नहरें हैं,उन्हें पुनर्जीवित करने की जरूरत है।खेत की मेड़ पर पेड़ लगाने की दिशा में सबको ध्यान देना चाहिए और इस पर काम करना चाहिए।इसके अलावा पुराने चंदेलकालीन तालाब के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है।

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