*आशीष गोयल की निरंकुशता चरम पर: आचरण नियमावली तोड़ी, 1.30 करोड़ बिना मंजूरी चंदा दिया,*संविदा कर्मियों का समझौता तोड़ा, जनता के साथ दोहरी वसूली*
लखनऊ। *उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल (IAS) की कार्यशैली अब खुलेआम तानाशाही का रूप ले चुकी है।* *उन्होंने DoPT द्वारा जारी अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली के स्पष्ट प्रावधानों की अवहेलना करते हुए डिस्कॉम एसोसिएशन की सदस्यता ली और बिना किसी पूर्व मंजूरी के विभागीय फंड से 1 करोड़ 30 लाख रुपये का चंदा दे दिया।*
*आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन DoPT (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) की आचरण नियमावली के नियम 10 के अनुसार बिना सरकार की पूर्व मंजूरी के कोई चंदा या फंड स्वीकार करना प्रतिबंधित है। नियम 13 के तहत किसी एसोसिएशन में सक्रिय सदस्यता भी मना है।*
*फिर भी आशीष गोयल ने ये सब नियम तोड़ डाले*।
*संविदा कर्मचारियों की छंटनी से लखनऊ में बिजली संकट आउटसोर्स/संविदा कर्मचारियों को मनमाने ढंग से निकालने की वजह से बिजली व्यवस्था चरमरा गई है*। *लखनऊ राजधानी क्षेत्र (जहाँ वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है) में लोगों को 16 से 18 घंटे तक बिजली नहीं मिल रही है*।
*प्राइवेटाइजेशन की साजिश?*
*आरोप है कि यह आशीष गोयल की सोची-समझी रणनीति है। वे जानबूझकर हालात बिगाड़ रहे हैं ताकि जनता खुद* *प्राइवेटाइजेशन की माँग करे। उन्होंने ब्लैकलिस्टेड अमेरिकन कंपनी को प्राइवेटाइजेशन का टेंडर मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंप दी। कंपनी ने ब्लैकलिस्टिंग छुपाई, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।*
FPPAS में दोहरी वसूली — *जनता के साथ धोखाधड़ी UPPCL पर गंभीर आरोप है* *कि 9606 करोड़ रुपये की राशि पहले ही ARR (Annual Revenue Requirement) में शामिल है और UPERC (नियामक आयोग) ने इसे मंजूरी दे रखी है*। *इसमें सालाना हिसाब-किताब, बजट और सभी डिस्काउंट पहले से ही शामिल हैं।*
*फिर भी FPPAS (ईंधन और बिजली खरीद समायोजन सरचार्ज) के नाम पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली की जा रही है*। *यह साफ-साफ दोहरी वसूली और जनता के साथ धोखाधड़ी है*।
*संयुक्त समिति का समझौता भी तोड़ा गया*
*संयुक्त समिति ने मंत्री जी के सामने पूर्व प्रबंध निदेशक पंकज कुमार के साथ MOA के अनुसार MD नियुक्ति का समझौता किया था, लेकिन उसका भी अनुपालन नहीं किया गया।*
*भवानी सिंह खंगारौत का दंडात्मक स्थानांतरण*
*मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक भवानी सिंह खंगारौत ने संविदा* *कर्मचारियों की छंटनी का विरोध किया, तो उन्हें तुरंत हटा दिया गया।*
*मंत्री के साथ टकराव*
*ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के 02.06.2026 के पत्र में दिए गए स्पष्ट निर्देशों की भी अनदेखी की गई*। *चर्चा है कि आशीष गोयल ने मंत्री को कथित तौर पर कहा था* *“तुम पाँच साल के लिए हो, मैं साठ साल के लिए हूँ तो अपनी हैसियत में रहकर बात करो”।*
*समय का उपभोक्ता इस चर्चा की पुष्टि करता है, ना ही खंडन करता है।*
*समय का उपभोक्ता का सवाल*
*क्या आशीष गोयल खुद को*कानून, नियामक आयोग और मंत्री से भी ऊपर समझते हैं? आचरण नियमावली तोड़ना, समझौते धज्जियाँ उड़ाना, 9606 करोड़ की पहले से मंजूर राशि पर दोहरी वसूली*, *ब्लैकलिस्टेड कंपनी को तरजीह और जनता को अंधेरे में रखना* — *ये सब कब तक चलेगा?*
*ऐसे व्यक्ति की आय से अधिक सम्पत्ति की एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर आज से ही जांच होनी चाहिए।* *जनता का पैसा, बिजली व्यवस्था और संविदा कर्मचारियों का भविष्य इस निरंकुशता की भेंट न चढ़े*।
*युद्ध अभी शेष है*।
*अविजित आनन्द*
*संपादक*
*चन्द्रशेखर सिंह*
*प्रबंध संपादक*
*समय का उपभोक्ता*
*राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ*









