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उत्तर प्रदेश में मीडिया नीति का विस्तार: डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलेगा बढ़ावा, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )ने किया स्वागत

*उत्तर प्रदेश में मीडिया नीति का विस्तार: डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलेगा बढ़ावा, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )ने किया स्वागत;*

सिम्मी भट्टी की खास रिपोर्ट।

​नई दिल्लीः:
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने राज्य की योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए एक नई और व्यापक मीडिया नीति लागू की है। सूचना निदेशक विशाल सिंह द्वारा जारी इस निर्देश में प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समन्वय को प्राथमिकता दी गई है।
​सरकार की नई गाइडलाइंस के मुख्य बिंदु:
​बेहतर तालमेल: जिला सूचना अधिकारियों और सहायक निदेशकों को स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ सक्रिय संपर्क बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
​प्री और पोस्ट-इवेंट कवरेज: सरकारी कार्यक्रमों के एक दिन पहले ‘प्री-इवेंट कंटेंट’ साझा किया जाएगा, जबकि कार्यक्रम समाप्त होने के दो घंटे के भीतर आधिकारिक प्रेस रिलीज और प्रभाव रिपोर्ट जारी करने की अनिवार्यता तय की गई है।
​डिजिटल विस्तार: कार्यक्रमों के प्रमुख वीडियो अंशों को DIPR और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा।
​प्रिंट मीडिया प्राथमिकता: प्रिंट मीडिया में मुख्यमंत्री से जुड़ी खबरों को पहले और अन्य प्रमुख पृष्ठों पर उचित स्थान देने पर जोर दिया गया है।
​भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने की सराहना, नीति में सुधार की मांग।
​भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। यूनियन के संस्थापक एके बिंदुसार ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को सशक्त बनाना ही पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की पहली शर्त है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए मीडिया की स्वतंत्रता अत्यंत आवश्यक है।
​हालांकि, इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा जारी एक निर्देश पर आपत्ति भी जताई है। एके बिंदुसार ने स्पष्ट कहा:
​”सूचना विभाग द्वारा जिले स्तर पर राजनेताओं या वीआईपी कार्यक्रमों की कवरेज के लिए सूचना कार्यालय के द्वारा प्रेस पास कार्ड जारी करने की नीति का हम विरोध करते हैं। यह कदम असंवैधानिक है। समाचार कवरेज के लिए प्रेस पास कार्ड जारी करने का अधिकार संबंधित समाचार पत्र-पत्रिकाओं, यूट्यूब चैनल, न्यूज़ पोर्टल के निदेशकों और मीडिया पत्रकार संगठनों के जिला अध्यक्षों के पास ही होना चाहिए।”
​इसके लिए संगठनों के अध्यक्षों से सूची मंगा लेनी चाहिए,
​उत्तर प्रदेश सरकार का यह नया कदम राज्य में सूचना तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। जहां एक ओर इसे मीडिया के डिजिटल एकीकरण के रूप में देखा जा रहा है, वहीं मीडिया संगठनों द्वारा उठाई गई आपत्तियां यह स्पष्ट करती हैं कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रेस पास कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सरकार को भविष्य में और अधिक स्पष्टता लानी होगी।

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