*लोकतंत्र के प्रहरी, जागो!* *लखनऊ की रणभूमि में शंखनाद का समय आ गया है*
लेखक: एके बिंदुसार, संस्थापक, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी
*साथियों,*
आज लोकतंत्र का चौथा स्तंभ एक चौराहे पर खड़ा है। एक ओर हमारी लेखनी की ताकत है, जो सत्ता के गलियारों तक गूंजती है, तो दूसरी ओर हमारे ही अधिकारों का हनन, सुरक्षा का अभाव और उपेक्षा की बेड़ियाँ हैं। हम जो दूसरों की लड़ाई लड़ते हैं, जो पीड़ितों की आवाज बनते हैं, आज समय आ गया है कि हम ‘स्वयं के हक’ की लड़ाई लड़ें।
23 अगस्त 2026, लखनऊ की ऐतिहासिक भूमि पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के तत्वाधान में आयोजित ‘महा रैली’ केवल एक सभा नहीं है, यह हमारे स्वाभिमान का पुनर्जागरण है।
क्यों आवश्यक है यह महा रैली?
लोकतंत्र की नींव रखने वाले हम पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता, आज असुरक्षित हैं। हमें सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कानून चाहिए। हमें सिर्फ वादे नहीं, बल्कि वे कल्याणकारी बोर्ड चाहिए जो संकट की घड़ी में हमारे परिवार का संबल बन सकें। जब तक हम संगठित नहीं होंगे, तब तक हमारी आवाज कानों तक तो पहुंचेगी, लेकिन नीति-निर्धारकों के हृदय तक नहीं।
यह आह्वान है, निमंत्रण नहीं!
मेरे पत्रकार साथियों, उत्तर प्रदेश के हर जिले से, भारत के हर कोने से, आप केवल अकेले नहीं आ रहे हैं, आप अपने साथ अपने क्षेत्र की उन समस्याओं को लेकर आ रहे हैं जिन्हें आपने कलम से उकेरा है। यह रैली
मीडिया विरोधियों को आईना दिखाने का माध्यम है: यह रैली बताएगी कि पत्रकारिता और समाजसेवा बिकाऊ नहीं, बल्कि देश की रीढ़ हैं।
अधिकारों की गूँज है: हमारी एकजुटता ही वह शक्ति है जो सरकार को ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू करने के लिए अनुकरणीय एवं अनिवार्य करेगी।
शक्ति प्रदर्शन नहीं, वैचारिक क्रांति है: हम देश को यह दिखा देंगे कि लोकतंत्र के रक्षक जब एक मंच पर होते हैं, तो नीति और नीयत दोनों बदल जाती हैं।
हर जिले से लखनऊ तक का संकल्प
मैं आपसे आह्वान करता हूँ—अपनी कलम की स्याही को संकल्प के रंग में बदल लें। जो भी इस महा अभियान का हिस्सा है, वह अपने जिले में केवल एक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि एक ‘क्रांतिदूत’ बनकर काम करे। हर ब्लॉक, हर जिले से इतनी संख्या में लोग निकलें कि लखनऊ की सड़कें हमारे पदचाप से गूँज उठें।
यदि आप चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित कार्यक्षेत्र मिले, यदि आप चाहते हैं कि ‘चौथे स्तंभ’ को वह सम्मान मिले जिसका वह हकदार है, तो 23 अगस्त को लखनऊ में उपस्थित होना अनिवार्य है।
याद रखें:
इतिहास उन लोगों को याद नहीं रखता जो भीड़ का हिस्सा बनते हैं, इतिहास उन लोगों को याद रखता है जो भीड़ का नेतृत्व करते हैं। आप सभी नेतृत्वकर्ता हैं।
आओ, एक नई इबारत लिखें।
आओ, अपने हक की हुंकार भरें।
23 अगस्त, लखनऊ—हमारा इंतज़ार कर रहा है!
जय हिंद! जय पत्रकारिता!
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी
संपर्क: 7275850466









