गवाह होस्टाइल क्यों होता है?गवाह अक्सर दबाव, लालच या अन्य कारणों से अपने बयान बदलते हैं, जानकारी निशा कांत शर्मा एडवोकेट

गवाह होस्टाइल (Hostile Witness) होना या पक्षद्रोही होना उस स्थिति को कहते हैं जब अदालत में कोई गवाह उस पक्ष ( prosecution या defence) के खिलाफ बयान देता है, जिसने उसे गवाही के लिए बुलाया है, या वह पुलिस को दिए गए अपने पहले के बयानों से मुकर जाता है。

1. गवाह होस्टाइल क्यों होता है?गवाह अक्सर दबाव, लालच या अन्य कारणों से अपने बयान बदलते हैं :धमकी या डर: आरोपियों या प्रभावशाली लोगों द्वारा डराया-धमकाया जाना।लालच: पैसे या अन्य लाभों का प्रलोभन मिलना।प्रभाव: पारिवारिक, सामाजिक या राजनीतिक दबाव में आना।

2. भारतीय कानून में प्रावधानभारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act, Section 154): इसके तहत यदि कोई गवाह मुकरता है या अपने पक्ष के खिलाफ बोलता है, तो जिस पक्ष ने उसे बुलाया है, वह अदालत से उस गवाह को ‘होस्टाइल’ घोषित करने का अनुरोध कर सकता है。

अदालत की अनुमति मिलने के बाद, बुलाने वाला वकील भी उस गवाह से तीखे और सीधे सवाल (cross-examination/leading questions) पूछ सकता है, जो सामान्य परिस्थिति (direct examination) में अपने ही गवाह से पूछने की अनुमति नहीं होती है।

3. गवाह के होस्टाइल होने पर क्या केस खत्म हो जाता है?नहीं। गवाह के मुकर जाने से केस पूरी तरह से कमजोर नहीं होता :अदालत गवाह के मुकरे हुए बयानों को पूरी तरह खारिज नहीं करती; बल्कि उसका वह हिस्सा जो अन्य परिस्थितियों, मेडिकल रिपोर्ट्स या सीसीटीवी फुटेज से मेल खाता है, उसे सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है。

झूठी गवाही का परिणाम: यदि अदालत को लगता है कि गवाह ने जानबूझकर अदालत को गुमराह किया है या झूठी गवाही दी है, तो उस गवाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 193 के तहत कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान भी है。

4. बचाव के अन्य तरीके (Secondary Evidence)अदालत केवल मौखिक गवाही पर ही निर्भर नहीं रहती। यदि मुख्य गवाह होस्टाइल हो भी जाए, तो वकील केस को साबित करने के लिए अन्य तरीकों का इस्तेमाल करते हैं:

परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence)फोरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्यअन्य चश्मदीद गवाह (अगर हों)कॉल रिकॉर्डिंग, दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आदि

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