भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF- नेशनल)मिशन:
पार्ट 4
महाक्रांति का शंखनाद: अभिव्यक्ति की दूसरी आजादी, सशक्त पत्रकार और विश्वगुरु सनातन भारत का नवनिर्माण
लेखक-एके बिंदुसार
संस्थापक
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल ) कोर कमेटी ।
नई दिल्ली!
“सत्यमेव जयते” के उद्घोष के साथ, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का 214 सदस्यीय संस्थापक मंडल एवं राष्ट्रीय नेतृत्व देश के समस्त पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आह्वान करता है। यह आलेख केवल शब्द नहीं, बल्कि उस वैचारिक क्रांति की मशाल है जो भ्रष्टाचार के अंधकार को मिटाकर भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ के सिंहासन पर प्रतिष्ठित करेगी।
1. सनातन भारत: विश्व गुरु का शाश्वत सत्य:
भारत मात्र एक भौगोलिक नक्शा नहीं, बल्कि एक अमर सांस्कृतिक चेतना है। प्राचीन काल से ही तक्षशिला और नालंदा के ज्ञान से लेकर अध्यात्म की शक्ति तक, भारत सदैव विश्व गुरु था, है और अनंत काल तक रहेगा।
हमारा संकल्प: हम उस सनातन परंपरा के वंशज हैं जहाँ ‘न्याय’ सर्वोपरि है। BMF का प्रत्येक सदस्य इस गौरवशाली विरासत का सजग प्रहरी है। हमारी पत्रकारिता राष्ट्र के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के पुनरुत्थान का माध्यम है।
‘सनातन’ का अर्थ है—जो सदा से है और सदा रहेगा।
मानव उत्थान में भूमिका:
जब विश्व अंधकार में था, तब भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) का मंत्र दिया। योग, आयुर्वेद, शून्य और खगोल विज्ञान के माध्यम से हमने मानवता का मार्ग प्रशस्त किया।
लोकतंत्र की जननी:
वेदों की ‘सभा’ और ‘समिति’ से लेकर आज के सशक्त मीडिया तक, भारत ने सदैव संवाद और न्याय को सर्वोपरि रखा है।
वैचारिक विविधता: एक ही मूल से निकले अनेक पंथ!
भारत की पावन धरा ने सत्य की खोज में अनेक धाराओं को जन्म दिया। इतिहास और दर्शन के अनुसार:
भारतीय मूल के पंथ:
सनातन धर्म की कोख से ही जैन, बौद्ध और सिख जैसे महान पंथों का उदय हुआ। इन सभी का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा, अहिंसा, करुणा और न्याय ही रहा है।
इस्लाम और भारत का संबंध: इस्लाम का उदय अरब की धरती पर हुआ, लेकिन भारत में इसका आगमन व्यापार और सूफी संतों के माध्यम से भी हुआ। भारतीय संस्कृति की विशालता ने ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को जन्म दिया, जहाँ साझा विरासत और राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि रही।
एक ही लक्ष्य:
चाहे पंथ कोई भी हो, एक सच्चा पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता वही है जो मानवता, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति अपने ‘धर्म’ (कर्तव्य) का पालन करे। भ्रष्टाचार के विरुद्ध युद्ध में हर पंथ के सच्चे अनुयायी का लक्ष्य एक ही है—न्यायपूर्ण समाज।
2. अभिव्यक्ति की ‘दूसरी आजादी’ की प्रथम महाक्रांति:
1947 की आजादी प्रशासनिक थी, लेकिन आज जिस ‘दूसरी आजादी’ की आवश्यकता है, वह है—भ्रष्टाचार, भय और सूचनात्मक गुलामी से मुक्ति।
यह डिजिटल और जमीनी युग की वह महाक्रांति है जहाँ समाज का हर कलमकार और कार्यकर्ता बिना किसी दबाव के सत्य को स्थापित करेगा।
परिवर्तन का शंखनाद:
जब एक पत्रकार सच लिखता है, तो वह केवल सूचना नहीं देता, बल्कि अन्याय के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करता है। यह क्रांति सूचना के लोकतंत्रीकरण और जवाबदेही की है।
3. राष्ट्र के प्रहरी: कर्तव्य, अधिकार, सम्मान और सुरक्षा:
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने के लिए BMF इन चार बुनियादी सिद्धांतों पर अडिग है:
कर्तव्य:
निष्पक्षता और राष्ट्रहित को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखना। समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को शासन की फाइलों तक पहुँचाना हमारा धर्म है।
अधिकार:
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और RTI जैसे हथियारों का प्रभावी उपयोग। ‘पत्रकार सुरक्षा अधिनियम’ और मीडिया को संवैधानिक दर्जा दिलाना हमारा लक्ष्य है।
सम्मान:
जो समाज अपने सच बोलने वालों की कद्र नहीं करता, उसका पतन निश्चित है। पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को समाज में ‘राजकीय सम्मान’ और प्रतिष्ठा मिलना अनिवार्य है।
सुरक्षा:
फील्ड में काम करने वाले साथियों के लिए कानूनी, सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा का कवच सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
4. सशक्त मीडिया: भ्रष्टाचार मुक्त एवं समृद्ध भारत का नवनिर्माण:
भ्रष्टाचार वह दीमक है जो राष्ट्र की नींव खोखला करता है। सशक्त मीडिया इस दीमक को मिटाने वाली सूर्य की किरण है।
पारदर्शिता ही समृद्धि है:
जब व्यवस्था पारदर्शी होगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिक तक पहुँचेगा।
समृद्ध भारत का स्वप्न:
एक ऐसा भारत जहाँ न्याय केवल धनवानों तक सीमित न हो। मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता ही एक न्यायपूर्ण और विकसित राष्ट्र का आधार बनेगी।
5. संस्थापक एवं राष्ट्रीय नेतृत्व का ओजस्वी आह्वान:
मेरे प्रिय कलम के सिपाहियों! इतिहास साक्षी है कि परिवर्तन हमेशा संघर्ष की कोख से जन्म लेता है।
कलम की धार:
आपकी लेखनी में चंद्रशेखर आजाद जैसी धार और स्वामी विवेकानंद जैसा सेवा भाव होना चाहिए।
एकजुटता की शक्ति:
अकेले हम कमजोर हो सकते हैं, लेकिन भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल)के झंडे तले हम एक अभेद्य दुर्ग हैं। यदि एक भी साथी पर अन्याय होगा, तो पूरा संगठन उसकी ढाल बनेगा।
सृजन का समय:
उठो! जागो! और तब तक मत रुको जब तक भारत पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर सुशोभित न हो जाए। यह समय सोए रहने का नहीं, बल्कि इतिहास रचने का है।
यह ‘मिशन पार्ट 4’ भ्रष्टाचार के विरुद्ध अंतिम युद्ध का घोषणापत्र है। आइए, कंधे से कंधा मिलाकर इस महाक्रांति को सफल बनाएँ और एक ऐसे भारत का निर्माण करें जहाँ हर नागरिक गर्व से कह सके—
“मेरा भारत, महान भारत।”
जय हिन्द! जय भारतीय मीडिया फाउंडेशन!
अभिव्यक्ति की आजादी अमर रहे! भारत माता की जय!







