प्रयागराज बोर्ड के नाम पर छात्रों से ठगी का खेल, QR कोड और फर्जी बैंक अकाउंट से लूटने वाले गैंग का पर्दाफाश

*प्रयागराज बोर्ड के नाम पर छात्रों से ठगी का खेल, QR कोड और फर्जी बैंक अकाउंट से लूटने वाले गैंग का पर्दाफाश*

 

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*

 

एटा/प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (प्रयागराज बोर्ड) के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट छात्रों को निशाना बनाकर साइबर ठगों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो गया है। स्क्रूटनी और उत्तर पुस्तिका पुनरीक्षण कराने वाले छात्रों को फोन कर खुद को बोर्ड का कर्मचारी या डेटा ऑपरेटर बताने वाले शातिर अब खुलेआम QR कोड और बैंक अकाउंट भेजकर वसूली कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, परिणाम घोषित होते ही छात्रों का डेटा गलत हाथों में पहुंच गया और अब यही जानकारी ठगी का हथियार बन चुकी है। ठग छात्रों और अभिभावकों को डराते हुए कहते हैं कि “मार्क्स कम हो गए हैं”, “कॉपी में गड़बड़ी है”, या “पैसे जमा कर दो तो नंबर बढ़वा देंगे”। इसके बाद छात्रों से QR कोड स्कैन करवाया जाता है या बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराई जाती है।

जांच में सामने आया कि ठगी के लिए एक संदिग्ध बैंक खाता इस्तेमाल किया जा रहा है—

➡️खाता धारक का नाम: RANA

➡️खाता संख्या: 501058506751

➡️IFSC: NSPB0000002

➡️बैंक: NSDL BANK

इसके अलावा +91 84480 65895 नंबर से छात्रों को लगातार कॉल किए जाने की जानकारी मिली है। आरोपी खुद को “ज्ञान सिंह” बताकर छात्रों को झांसे में लेने की कोशिश करता है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह गिरोह सीधे छात्रों के भविष्य और अभिभावकों की मेहनत की कमाई पर हमला कर रहा है। शिक्षा व्यवस्था के नाम पर हो रही इस ठगी ने हजारों परिवारों में डर और गुस्सा पैदा कर दिया है।

*छात्रों और अभिभावकों के लिए जरूरी सावधानियां*

बोर्ड अधिकारी बनकर आने वाले किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें।

किसी भी QR कोड को स्कैन न करें।

किसी अनजान खाते में पैसा जमा न करें।

केवल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस पर ही विश्वास करें।

तुरंत साइबर सेल और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

*प्रशासन से उठी सख्त कार्रवाई की मांग*

शिक्षा जगत और अभिभावकों ने मांग की है कि इस पूरे डेटा लीक और साइबर ठगी नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। संदिग्ध बैंक खाते को तत्काल फ्रीज किया जाए और मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी संख्या में छात्र इस साइबर गिरोह का शिकार हो सकते हैं। साइबर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

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